पूर्व रोजगार सहायक पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से नौकरी पाने का आरोप, जांच की उठी मांग

गरियाबंद जिले की ग्राम पंचायत मुड़ागांव के उपसरपंच खिरसिंधु नागेश ने पूर्व ग्राम रोजगार सहायक उधोराम नागेश पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने का आरोप लगाया है। उपसरपंच ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग करते हुए उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजने की बात कही है। फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

Jun 29, 2026 - 13:48
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पूर्व रोजगार सहायक पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से नौकरी पाने का आरोप, जांच की उठी मांग

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l जिले की ग्राम पंचायत मुड़ागांव में पूर्व ग्राम रोजगार सहायक पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद पंचायत और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। ग्राम पंचायत के उपसरपंच खिरसिंधु नागेश ने पूर्व ग्राम रोजगार सहायक उधोराम नागेश पर कथित रूप से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

उपसरपंच खिरसिंधु नागेश का आरोप है कि उधोराम नागेश ने प्रशासन को गुमराह करते हुए स्वयं को दिव्यांग बताकर ग्राम रोजगार सहायक के पद पर नियुक्ति हासिल की। उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति में उधोराम नागेश किसी भी दृष्टि से दिव्यांग नहीं हैं और कथित रूप से गलत दस्तावेजों का उपयोग कर सरकारी नौकरी प्राप्त की गई।

उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की जाएगी और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।

उपसरपंच के आरोप सामने आने के बाद ग्राम पंचायत क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोगों के बीच भी मामले को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि अभी तक प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और न ही आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हुई है।

जानकारों का कहना है कि यदि किसी सरकारी नियुक्ति में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किए जाने की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाता है। जांच में यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाती है।

फिलहाल यह मामला आरोपों के स्तर पर है और इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन द्वारा शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित प्रमाण पत्रों, नियुक्ति प्रक्रिया तथा अन्य अभिलेखों की जांच किए जाने की संभावना है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।