बैकयार्ड मुर्गीपालन से बदली सुनीता नरवास की जिंदगी, आत्मनिर्भरता की बनी मिसाल

नारायणपुर जिले के ग्राम सहपाल की सुनीता नरवास ने स्व-सहायता समूह और बिहान योजना से जुड़कर उन्नत बैकयार्ड मुर्गीपालन शुरू किया। वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से उन्हें शुरुआती चरण में 15,075 रुपये की शुद्ध आय हुई और अब वह प्रति माह 20 हजार रुपये आय का लक्ष्य लेकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

Jul 11, 2026 - 11:17
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बैकयार्ड मुर्गीपालन से बदली सुनीता नरवास की जिंदगी, आत्मनिर्भरता की बनी मिसाल

UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच संघर्ष कर रहीं नारायणपुर जिले के ग्राम सहपाल की सुनीता नरवास ने आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी) परियोजना से जुड़कर उन्होंने उन्नत बैकयार्ड मुर्गीपालन को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया।

कुछ समय पहले तक सुनीता नरवास के परिवार की आय का प्रमुख स्रोत सीमित कृषि और अस्थायी मजदूरी थी। आय अनिश्चित होने के कारण परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी करना भी चुनौतीपूर्ण था। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बेहतर आजीविका के अवसरों की तलाश जारी रखी।

सुनीता नरवास के जीवन में बदलाव तब आया जब उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित साई बाबा स्व-सहायता समूह की सदस्यता ली। समूह की नियमित बैठकों, बचत की आदत और वित्तीय प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षणों से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इसी दौरान उन्हें एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी) परियोजना की जानकारी मिली, जिसके माध्यम से उन्हें आधुनिक कृषि आधारित आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

आईएफसी परियोजना के सहयोग से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए उन्नत बैकयार्ड मुर्गीपालन शुरू किया। मुर्गियों के संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने का सकारात्मक परिणाम उन्हें जल्द ही मिलने लगा। शुरुआती चरण में ही उन्हें 15,075 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने मुर्गीपालन को स्थायी आय का मजबूत साधन बना लिया।

आज सुनीता नरवास का परिवार पहले की तुलना में कहीं अधिक आर्थिक रूप से सशक्त हो चुका है। वह आईएफसी परियोजना के सहयोग से अपने मुर्गीपालन व्यवसाय का लगातार विस्तार कर रही हैं और आने वाले समय में प्रति माह 20 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं। उनकी सफलता से न केवल उनके परिवार का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी नई प्रेरणा मिली है।

सुनीता नरवास का कहना है कि बिहान योजना और एकीकृत कृषि क्लस्टर परियोजना ने उन्हें केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बनाया, बल्कि समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया है। अब उनके गांव की कई महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर वैज्ञानिक आजीविका गतिविधियों को अपना रही हैं।

सुनीता नरवास की यह सफलता दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनकी कहानी महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई है।