बालोद में 50 साल पुराने महुआ के पांच पेड़ों की कटाई, ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की उठाई मांग

बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम फूंडा में करीब 50 वर्ष पुराने पांच महुआ के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने लकड़ी माफियाओं पर दिनदहाड़े पेड़ काटने का आरोप लगाते हुए वन, राजस्व और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Jul 11, 2026 - 12:07
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बालोद में 50 साल पुराने महुआ के पांच पेड़ों की कटाई, ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की उठाई मांग

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l जिले के गुंडरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम फूंडा में वर्षों पुराने महुआ के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि धान संग्रहण केंद्र के पीछे तांदुला मुख्य नहर से लगी एक निजी भूमि पर खड़े करीब 50 वर्ष पुराने पांच महुआ के पेड़ों को दिनदहाड़े काटकर ले जाया गया। घटना को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार, 9 जुलाई की सुबह लगभग 11 बजे आधुनिक आरा मशीन की सहायता से पेड़ों की कटाई शुरू हुई, जो दोपहर करीब 3 बजे तक लगातार चलती रही। उनका दावा है कि इस दौरान पांचों बड़े महुआ के पेड़ों को काटकर वाहन के माध्यम से मौके से ले जाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पूरी घटना खुलेआम हुई, लेकिन किसी भी जिम्मेदार विभाग ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कथित तौर पर लकड़ी माफियाओं और आरा मिल संचालकों ने इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। उनका कहना है कि वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों की ओर से नहीं की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि महुआ का पेड़ केवल पर्यावरणीय दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय आजीविका से भी जुड़ा होता है। ऐसे पेड़ों की कटाई से पर्यावरण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के हित भी प्रभावित होते हैं।

इस घटना के बाद पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासनिक दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर शासन वृक्षारोपण अभियान और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर दशकों पुराने पेड़ों की कथित अवैध कटाई पर समय पर कार्रवाई नहीं होना चिंताजनक है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि पेड़ों की कटाई नियमों के तहत हुई या नहीं। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध कटाई सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वन एवं अन्य लागू कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।

फिलहाल इस मामले में संबंधित विभागों की ओर से आधिकारिक कार्रवाई या जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। अब लोगों की निगाहें वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।