आवास योजना राशि बना हत्या का कारण
पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि को लेकर विवाद था। जानकारी के अनुसार, ₹40 हजार की रकम को लेकर आरोपी और मृतिका के बीच विवाद चल रहा था।
आरोपी ने जयंती मंडल को काम दिलाने के बहाने जंगल में ले जाकर उस पर पत्थर से हमला किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था।
9 माह बाद सुलझा मामला
यह मामला पिछले 9 महीनों से पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। पुलिस ने लगातार तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र के आधार पर जांच जारी रखी। अंततः आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिली और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई
मामले की जांच पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के निर्देशन में तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश सिन्हा के नेतृत्व में की गई। इस दौरान थाना प्रभारी निरीक्षक प्रहलाद यादव सहित पुलिस टीम ने लगातार मेहनत करते हुए केस को सुलझाया।
जांच में साइबर टीम की भी अहम भूमिका रही, जिसने तकनीकी साक्ष्यों के माध्यम से आरोपी की पहचान और लोकेशन ट्रेस करने में मदद की।
पुलिस टीम की अहम भूमिका
इस कार्रवाई में प्रधान आरक्षक गजेंद्र गेंन्द्रे, आरक्षक अवध, देवराज गावड़े तथा साइबर टीम के निरीक्षक यशवंत श्याम, निरीक्षक जितेंद्र साहू, एएसआई भकेश पटेल, सचिन शोरी, रामरतन निषाद, प्रणय यादव, दिनेश ध्रुव और हिमेश्वर मंडावी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
तकनीकी साक्ष्यों से मिली सफलता
पुलिस ने आधुनिक तकनीक और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई। लगातार प्रयास और सटीक रणनीति के चलते इस हत्याकांड का खुलासा संभव हो सका।
कुल मिलाकर, 9 माह पुराने इस अंधे हत्याकांड का खुलासा पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, बल्कि अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश भी गया है।