एमसीबी में कलेक्टर की सख्ती: DMF नियमों के पालन पर जोर, 5 वर्षीय विकास योजना बनाने के निर्देश

एमसीबी जिला में आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने DMF योजनाओं के कड़ाई से पालन और 5 वर्षीय समग्र विकास योजना तैयार करने के निर्देश दिए। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया।

Apr 21, 2026 - 14:42
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एमसीबी में कलेक्टर की सख्ती: DMF नियमों के पालन पर जोर, 5 वर्षीय विकास योजना बनाने के निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र सुकला l  एमसीबी जिला के कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा समीक्षा बैठक में कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने प्रशासनिक कार्यों में सख्ती और जवाबदेही पर जोर दिया। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई, जिसमें खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, वित्तीय अनुशासन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी गई।

कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के संशोधित दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। उन्होंने बताया कि खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत बनाए गए नियमों का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।

बैठक में जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) के तहत संचालित और प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि केवल उन्हीं परियोजनाओं को मंजूरी दी जाएगी, जो सीधे तौर पर प्रभावित क्षेत्रों को लाभ पहुंचाएं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि व्यक्तिगत लाभ या योजना के उद्देश्य से हटकर किए जाने वाले कार्यों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए कुछ कार्यों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया। इनमें व्यायामशाला नवीनीकरण, मुर्गों की लड़ाई के लिए चबूतरा निर्माण, पंचायत उपयोग के लिए मोबाइल या वाहन खरीद जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा मूर्तियां, स्मारक, हेलीपैड, शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स और निजी औद्योगिक पार्क जैसे कार्यों को भी योजना से बाहर रखने के निर्देश दिए गए।

सभी विभागों को 5 वर्षीय पर्सपेक्टिव प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिसे 15 मई 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इस योजना में जिले के समग्र विकास का रोडमैप तैयार किया जाएगा। कलेक्टर ने 50 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के लिए विस्तृत योजना और 25-30 करोड़ के कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही।

बैठक में विभिन्न विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनबाड़ी केंद्रों का सर्वे कर हर साल कम से कम 30 केंद्रों के निर्माण या उन्नयन का लक्ष्य तय करने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

पंचायत विभाग को जल संरक्षण के लिए चेक डैम निर्माण की योजना बनाने को कहा गया, वहीं सभी अधोसंरचना परियोजनाओं में बिजली सुविधा को अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने यह भी कहा कि सभी विभाग अपने कार्यों की जानकारी नियमित रूप से ऑनलाइन अपडेट करें, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए लंबित मामलों के त्वरित निराकरण, सीमांकन और नामांतरण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने प्रशासनिक खर्च को कम रखते हुए जनहित कार्यों पर अधिक ध्यान देने की बात कही और चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह बैठक प्रशासनिक सुधार और विकास कार्यों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।