रायपुर में ईंट भट्टी पर छापा: बाल अधिकार आयोग की त्वरित कार्रवाई से 3 नाबालिग बच्चियां मुक्त
रायपुर के बीरगांव क्षेत्र में ईंट भट्टी पर छापेमारी कर 3 नाबालिग बच्चियों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर जिले के बीरगांव क्षेत्र में बाल श्रम के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के निर्देश पर ईंट भट्टी में छापेमारी कर तीन नाबालिग बच्चियों को मुक्त कराया गया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन की सख्ती को उजागर किया है।
जानकारी के अनुसार, आयोग को सूचना मिली थी कि बीरगांव स्थित एक ईंट भट्टी में बच्चों से अवैध रूप से काम कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही डॉ. वर्णिका शर्मा ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एक संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिए। पहले मौके का निरीक्षण किया गया और उसके बाद योजनाबद्ध तरीके से सुबह करीब 6 बजे टीम को कार्रवाई के लिए भेजा गया।
छापेमारी के दौरान तीन नाबालिग बच्चियां ईंट भट्टी पर काम करती हुई पाई गईं। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उनकी उम्र 14 वर्ष से कम है, जो बाल श्रम निषेध कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी बच्चियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
रेस्क्यू के बाद बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन बच्चियों को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और बेहतर जीवन उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे दोबारा इस तरह के शोषण का शिकार न हों।
इस मामले में संबंधित संचालकों के खिलाफ बाल श्रम निषेध अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बाल श्रम जैसे गंभीर अपराध को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस अभियान में जिला बाल संरक्षण इकाई, श्रम विभाग और सामाजिक कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम में माधुरी शर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला, सामाजिक कार्यकर्ता गोरखनाथ पटेल, श्रम निरीक्षक, अभिमन्यु भरिया और विपिन ठाकुर सहित चाइल्डलाइन के सदस्य शामिल थे।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल श्रम के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करने की हिम्मत न कर सके।
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों को श्रम में झोंकना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि उनके भविष्य के साथ भी गंभीर अन्याय है। प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए मिलकर प्रयास करें।