जगद्गुरु शंकराचार्य के चरणों में मनोज सिंह ठाकुर ने किया पादुका पूजन, गौ-रक्षा का लिया संकल्प
बेमेतरा प्रवास के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से आशीर्वाद लिया। उन्होंने पादुका पूजन कर गौ-रक्षा और धर्म रक्षा का संकल्प लिया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, बेमेतरा/रायपुर। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य, अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने अपने बेमेतरा प्रवास के दौरान एक आध्यात्मिक कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने सपरिवार ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम के दौरान श्री ठाकुर ने अपने भाइयों और परिवारजनों के साथ मिलकर विधिवत चरण-पादुका पूजन किया। उन्होंने श्रद्धा भाव से शंकराचार्य जी को रुद्राक्ष की माला भेंट की और उनके प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। इस आध्यात्मिक वातावरण में भक्तिमय माहौल देखने को मिला, जहां उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी महाराज श्री के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
महाराज \के साथ हुई चर्चा के दौरान धर्म, समाज और राष्ट्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर मनोज सिंह ठाकुर ने गौ-रक्षा और धर्म रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि "धर्म की जय हो और अधर्म का नाश हो" केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर सनातनी के जीवन का मूल संकल्प होना चाहिए।
ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में ऐसे लोग भी हैं जो धर्म के नाम पर पाखंड करते हैं और गौ-हत्या जैसे गंभीर विषयों पर मौन रहते हैं। ऐसे लोगों के प्रति उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उनका पतन निश्चित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपने सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी दायित्वों का उपयोग जनसेवा और धर्म की रक्षा के लिए निरंतर करते रहेंगे।
इस अवसर पर चारों भाइयों की एक साथ उपस्थिति को शंकराचार्य महाराज ने विशेष महत्व देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने धर्म और समाज के कल्याण के लिए प्रार्थना की।
यह कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक और धार्मिक जागरूकता का भी संदेश देने वाला रहा। मनोज सिंह ठाकुर द्वारा लिया गया संकल्प क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे धर्म एवं गौ-रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।