भोरमदेव महोत्सव की संस्कृति संध्या में लोक व शास्त्रीय प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कवर्धा में आयोजित भोरमदेव महोत्सव की संस्कृति संध्या में लोक और शास्त्रीय प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बैगा नृत्य, कथक, भरतनाट्यम और भजन प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया।

Mar 18, 2026 - 11:32
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भोरमदेव महोत्सव की संस्कृति संध्या में लोक व शास्त्रीय प्रस्तुतियों ने बांधा समां

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा | भोरमदेव महोत्सव के अंतर्गत आयोजित संस्कृति संध्या कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक और शास्त्रीय सांस्कृतिक परंपराओं का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। कार्यक्रम में स्थानीय एवं अन्य जिलों से आए कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत ग्राम बरपानी के कलाकार मोहन द्वारा प्रस्तुत बैगा जनजाति के पारंपरिक नृत्य से हुई। इस लोकनृत्य में आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बैगा नृत्य की लय और पारंपरिक वेशभूषा ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया।

इसके बाद कवर्धा और बोड़ला स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने “रामेश्वरम दर्शन” और “नरसिंह अवतार” पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। छात्राओं की भावपूर्ण और सजीव प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।

शास्त्रीय नृत्य की कड़ी में रायपुर की अक्षिता दुबे और कवर्धा की दुर्गेश्वरी चंद्रवंशी ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया। उनके सधे हुए कदम, भाव-भंगिमाएं और आकर्षक मुद्राएं दर्शकों को काफी प्रभावित कर गईं।

इसी क्रम में बिलासपुर के युवराज सिंह लोनिया ने सुमधुर भजन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को भक्ति भाव से सराबोर कर दिया।

वहीं अध्या पांडे ने भरतनाट्यम नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय नृत्य की गहराई और सौंदर्य स्पष्ट रूप से झलक रहा था।

कार्यक्रम में मोहम्मद असन की वाद्य प्रस्तुति भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनकी मधुर धुनों पर दर्शक झूम उठे और पूरे परिसर में संगीत का सुरमय वातावरण बन गया।

भोरमदेव महोत्सव की यह संस्कृति संध्या कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध परंपराओं का सुंदर संगम बनकर सामने आया। लोक नृत्य, शास्त्रीय नृत्य, भजन और वाद्य संगीत की प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर कितनी समृद्ध और जीवंत है।

इस आयोजन ने न केवल कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया, बल्कि दर्शकों को भी कला और संस्कृति के विविध रंगों से रूबरू होने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने सभी कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए इसे एक यादगार सांस्कृतिक संध्या बताया।