ग्राम पंचायत लहसुनपाठ में भ्रष्टाचार का बोलबाला: बिना काम कराए सरपंच-सचिव ने डकारे लाखों रुपये
विकासखंड शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत लहसुनपाठ में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ तत्कालीन सरपंच और सचिव पर बिना कार्य कराए लाखों रुपये निकालने का आरोप है। हैंडपंप खनन और सफाई के नाम पर फर्जी बिल लगाकर सरकारी राशि का गबन किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान शंकरगढ़। विकासखंड शंकरगढ़ के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लहसुनपाठ में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीण विकास कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के तत्कालीन सरपंच और सचिव पर मिलीभगत कर सरकारी योजनाओं की राशि में गड़बड़ी करने और बिना कार्य कराए लाखों रुपये निकालने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग जमीनी स्तर पर विकास कार्यों के लिए किया जाना था, लेकिन इसके बजाय फर्जी बिलों के माध्यम से धनराशि का दुरुपयोग किया गया। शिकायत में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में टावर के पास हैंडपंप खनन कार्य स्वीकृत हुआ था। इसके बावजूद 28 नवंबर 2024 को सरपंच राधा सिंह और सचिव नंदपाल यादव द्वारा फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर 46,500 रुपये की पहली किश्त निकाल ली गई। हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर कार्य होना था, वहां आज तक कोई खनन या बोरिंग का काम शुरू ही नहीं हुआ।
इतना ही नहीं, हैंडपंपों की सफाई के नाम पर भी कथित रूप से बड़ा घोटाला किया गया है। जानकारी के अनुसार, 29 अक्टूबर 2024 को ‘मन्थन बोरवेल’ के नाम से फर्जी बिल लगाकर 60,000 रुपये की राशि निकाल ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत क्षेत्र में किसी भी हैंडपंप की सफाई नहीं कराई गई, जिससे साफ है कि यह राशि भी आपसी साठगांठ के तहत गबन कर ली गई।
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा, जबकि कागजों में काम पूरा दिखाकर पैसे निकाल लिए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल भ्रष्टाचार का उदाहरण होगा, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों को कब तक सजा मिलती है।