महाराष्ट्र में सियासी हलचल, उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों ने शिंदे को दिया समर्थन

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे को समर्थन देने की चिट्ठी लोकसभा स्पीकर को सौंपी है। इससे पार्टी में बड़ी टूट की स्थिति बन गई है।

Jun 17, 2026 - 18:18
 0  4
महाराष्ट्र में सियासी हलचल, उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों ने शिंदे को दिया समर्थन

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली, 17 जून 2026। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे गुट को समर्थन देने की घोषणा कर दी। इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर अपने समर्थन की जानकारी दी है।

सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने सुबह लगभग 9:30 बजे दिल्ली पहुंचकर यह चिट्ठी सौंपी। बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद नांदेड़, पुणे और मुंबई से अलग-अलग प्राइवेट विमान से दिल्ली पहुंचे थे। उनके साथ शिंदे गुट के एक वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। इस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी में लोकसभा में संख्या घटकर सिर्फ 3 सांसद रह गई है।

चिट्ठी सौंपने वाले सांसदों में संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल के नाम सामने आए हैं। हालांकि, संजय दीना पाटिल ने पहले पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज किया था और खुद को उद्धव ठाकरे के साथ बताया था, लेकिन बाद में उनका नाम भी इस सूची में शामिल हो गया।

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और चेतावनी भी दी। संजय राउत ने कहा कि पार्टी ने इन सांसदों को टिकट दिया और चुनाव लड़ने में मदद की, इसलिए ऐसे फैसले स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को “ऑपरेशन टाइगर” से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए।

दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे गुट के कुछ नेताओं ने दावा किया है कि अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी सांसद ने पार्टी छोड़ने का पत्र नहीं दिया है, और वे सभी अभी भी पार्टी के साथ हैं। इस दावे के बाद राजनीतिक स्थिति और अधिक उलझती नजर आ रही है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब शिवसेना में इस तरह की बड़ी टूट हुई है। वर्ष 2022 में भी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक पार्टी से अलग हो गए थे, जिसके बाद महाराष्ट्र की सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल गए थे। उस समय शिंदे गुट को ही असली शिवसेना के रूप में मान्यता मिलने का फैसला भी हुआ था।

ताजा घटनाक्रम को उसी राजनीतिक संघर्ष की अगली कड़ी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव ला सकता है और आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।