कोतमा पुलिस का बड़ा खुलासा: दुबई से संचालित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश, 8 आरोपी गिरफ्तार

अनूपपुर जिले के कोतमा में पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए चल रहे अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह का मास्टरमाइंड दुबई से नेटवर्क संचालित कर रहा था, जबकि 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

Mar 20, 2026 - 16:31
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कोतमा पुलिस का बड़ा खुलासा: दुबई से संचालित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश, 8 आरोपी गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. अनूपपुर। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा थाना पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह का नेटवर्क न केवल भारत के विभिन्न राज्यों तक फैला हुआ था, बल्कि इसके तार विदेशों तक भी जुड़े हुए पाए गए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड दुबई में बैठकर नेटवर्क को संचालित कर रहा था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब 27 फरवरी को भालूमाड़ा निवासी एक व्यक्ति ने कोतमा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि कुछ लोग सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर ग्रामीण और भोले-भाले लोगों के बैंक खाते खुलवा रहे हैं। इसके बाद वे उनके एटीएम कार्ड, पासबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में लेकर उनका दुरुपयोग कर रहे हैं।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि आरोपी विशेष रूप से ऐसे बैंक खातों को टारगेट करते थे, जिनकी एटीएम ट्रांजैक्शन लिमिट अधिक होती थी। खाताधारकों से जरूरी दस्तावेज लेने के बाद उन्हें अपने पास रख लिया जाता था और फिर इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और अवैध लेन-देन के लिए किया जाता था।

पुलिस के अनुसार, खाता खुलवाने के बाद संबंधित दस्तावेज मुंबई भेजे जाते थे। वहां से यह पूरा डेटा दुबई में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचाया जाता था, जो इन खातों के जरिए ऑनलाइन ठगी, अवैध ट्रांजैक्शन और कथित तौर पर ऑनलाइन गैम्बलिंग जैसे अपराधों को अंजाम देता था। ठगी से प्राप्त रकम को बाद में मुंबई के विभिन्न एटीएम से निकाला जाता था।

जांच के दौरान पुलिस टीम ने मुंबई में दबिश देकर एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई, जिसमें 145 एटीएम कार्ड, 23 सिम कार्ड, 20 पासबुक, 5 चेकबुक, 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और एक राउटर शामिल हैं। पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह प्रतिदिन 10 से 12 लाख रुपए तक की राशि निकालकर दुबई में बैठे सरगना तक पहुंचाता था।

पुलिस का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क काफी संगठित और तकनीकी रूप से मजबूत था। इसमें विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संपर्क स्थापित किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के तार श्रीलंका और नेपाल से भी जुड़े हो सकते हैं, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

कोतमा थाना प्रभारी रत्नाम्बर शुक्ला ने बताया कि मुख्य सरगना की गिरफ्तारी के लिए लुकआउट नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है और इसके लिए विशेष टीम गठित की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में बैंक कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है और विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

यह मामला इस बात का उदाहरण है कि साइबर अपराध किस तेजी से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का रूप ले रहे हैं। ऐसे में आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है और अपने बैंकिंग दस्तावेज किसी भी अनजान व्यक्ति को सौंपने से बचना चाहिए।

फिलहाल पुलिस की कार्रवाई जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस गिरोह के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।