खरीफ 2026 के लिए धान और हरी खाद के बीजों का पर्याप्त भंडारण, किसानों को समय पर मिलेगी सुविधा
खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ की सहकारी समितियों में 4.03 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण किया गया है। कृषि विभाग ने धान के उन्नत बीजों के साथ ढेंचा और मूंग जैसी हरी खाद के बीजों की भी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l खरीफ सीजन 2026 को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग ने किसानों के लिए उन्नत गुणवत्ता वाले बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी है। राज्य की सभी सहकारी समितियों में धान सहित विभिन्न फसलों के प्रमाणित बीजों का व्यापक भंडारण किया गया है, ताकि किसानों को बुवाई के समय किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कृषि विभाग के अनुसार भारत सरकार और राज्य सरकार के निर्देशों के तहत किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के विभिन्न प्रक्रिया केंद्रों से लगातार बीजों की आपूर्ति की जा रही है। विभागीय अधिकारियों द्वारा पूरी वितरण व्यवस्था की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
इस वर्ष बीज भंडारण के मामले में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है। खरीफ 2025 में इसी अवधि तक 4.01 लाख क्विंटल बीज का भंडारण किया गया था, जबकि खरीफ 2026 में अब तक 4.03 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा बीज प्रक्रिया केंद्रों में अतिरिक्त बफर स्टॉक भी सुरक्षित रखा गया है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर किसान सीधे वहां से भी बीज खरीद सकेंगे।
कृषि विभाग इस बार केवल बीज वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से हरी खाद के उपयोग को भी प्रोत्साहित कर रहा है। इसी कड़ी में सहकारी समितियों में 5,945 क्विंटल ढेंचा तथा 5,946 क्विंटल मूंग के बीजों का भंडारण किया गया है। किसानों द्वारा इन बीजों का उठाव भी प्रारंभ कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हरी खाद खेतों की उत्पादकता बढ़ाने का एक प्रभावी और कम खर्चीला प्राकृतिक उपाय है। इसके उपयोग से मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ती है और यूरिया तथा डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है। इससे खेती की लागत घटने के साथ-साथ भूमि की दीर्घकालिक उर्वरता भी बनी रहती है।
कृषि वैज्ञानिकों ने हरी खाद के उपयोग की प्रक्रिया भी बताई है। इसके तहत किसान पहले खेत में ढेंचा या मूंग की बुवाई करें और फसल को 45 से 60 दिनों तक बढ़ने दें। फूल आने से पहले इस फसल को ट्रैक्टर या हल की सहायता से मिट्टी में पलटकर मिला दिया जाए। इसके बाद हल्की सिंचाई कर दी जाए। दो से तीन सप्ताह के भीतर यह फसल पूरी तरह सड़कर प्राकृतिक खाद में बदल जाती है। इसके पश्चात धान, मक्का, गेहूं और गन्ना जैसी मुख्य फसलों की बुवाई करने पर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कृषि विभाग का कहना है कि किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने और खरीफ सीजन को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।