खैरागढ़ के टेकापार में कथित ब्लास्टिंग से हड़कंप, अनुमति को लेकर कंपनी और प्रशासन के दावों में विरोधाभास
खैरागढ़ के ग्राम टेकापार खुर्द में बिजली ट्रांसमिशन टॉवर निर्माण के दौरान कथित ब्लास्टिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने बिना सूचना रात में ब्लास्टिंग का आरोप लगाया है। कंपनी ने अनुमति होने का दावा किया है, जबकि एसडीएम और ग्राम पंचायत ने ऐसी किसी अनुमति से इनकार किया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. मनोहर सेन, खैरागढ़ l खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम पंचायत कलकसा के आश्रित ग्राम टेकापार खुर्द में बिजली ट्रांसमिशन टॉवर निर्माण के दौरान कथित ब्लास्टिंग को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि टॉवर की नींव तैयार करने के लिए पथरीली जमीन तोड़ने हेतु रात के समय दो बार विस्फोट किया गया, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया। घटना के बाद ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, अडाणी प्राइवेट लिमिटेड के लिए कार्य कर रहे कर्मचारियों द्वारा किसान परसराम वर्मा के खेत में ट्रांसमिशन टॉवर की नींव खोदी जा रही थी। इसी दौरान चट्टानी जमीन आने पर रात के अंधेरे में कथित रूप से ब्लास्टिंग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि विस्फोट से पहले न तो आसपास रहने वाले लोगों को कोई सूचना दी गई और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए। उनका आरोप है कि इससे लोगों और पशुओं की जान जोखिम में पड़ गई। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि क्षेत्र में इससे पहले भी इसी तरह ब्लास्टिंग की जा चुकी है।
मामले में कंपनी के मैनेजर अविनाश कुमार ने कहा कि ट्रांसमिशन टॉवर निर्माण सरकार की परियोजना के तहत किया जा रहा है और आवश्यक अनुमति लेकर ही कार्य किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ब्लास्टिंग की सूचना प्रशासन को दी गई थी तथा आवश्यक स्वीकृति प्राप्त थी। हालांकि जब उनसे अनुमति से संबंधित दस्तावेज मांगे गए तो वे कोई स्पष्ट दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
दूसरी ओर, एसडीएम टंकेश्वर प्रसाद साहू ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यालय से इस प्रकार की किसी ब्लास्टिंग की अनुमति जारी नहीं की गई है। वहीं ग्राम पंचायत टेकापार की सरपंच प्रीति देवी राजपूत ने भी कहा कि पंचायत को ब्लास्टिंग की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई और न ही पंचायत से किसी प्रकार की अनुमति ली गई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद खैरागढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ब्लास्टिंग नियमानुसार और वैधानिक प्रक्रिया के तहत की गई थी या नहीं। जांच के दौरान विस्फोटक सामग्री के उपयोग, संबंधित लाइसेंस, अनुमति और सुरक्षा मानकों सहित सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।
इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ब्लास्टिंग हुई तो उसकी अनुमति किस सक्षम प्राधिकारी ने दी? विस्फोटक सामग्री किस लाइसेंसधारी एजेंसी से प्राप्त की गई? यदि प्रशासन अनुमति से इनकार कर रहा है तो कंपनी किस आधार पर अनुमति होने का दावा कर रही है? इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस और प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल ग्रामीण निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।