बलरामपुर: मनरेगा तालाब गहरीकरण में लाखों के घोटाले का आरोप, ग्रामीणों ने तकनीकी जांच की मांग उठाई

बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत शाहपुर तेतरपोखरा में मनरेगा के तहत हुए तालाब गहरीकरण कार्य में भारी अनियमितता के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि लगभग 9 लाख रुपये की लागत दर्शाए गए कार्य में मौके पर डेढ़ लाख रुपये का काम भी दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों ने तकनीकी जांच, मस्टर रोल सत्यापन और माप पुस्तिका की जांच की मांग करते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।

Jun 23, 2026 - 19:33
 0  98
बलरामपुर: मनरेगा तालाब गहरीकरण में लाखों के घोटाले का आरोप, ग्रामीणों ने तकनीकी जांच की मांग उठाई

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर | जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत शाहपुर तेतरपोखरा में मनरेगा के तहत कराए गए तालाब गहरीकरण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि कार्य के लिए लगाए गए सूचना बोर्ड में लगभग 9 लाख रुपये की लागत दर्शाई गई है, जबकि मौके पर हुए कार्य को देखकर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के कोई प्रमाण नजर नहीं आते।

ग्रामीणों के अनुसार तालाब गहरीकरण के नाम पर केवल औपचारिक खुदाई की गई है और वास्तविक कार्य बेहद सीमित है। उनका कहना है कि स्थल निरीक्षण करने पर मुश्किल से एक से डेढ़ लाख रुपये तक का कार्य दिखाई देता है। आरोप है कि अधूरे कार्य को पूर्ण दिखाकर सरकारी राशि का भुगतान कर दिया गया।

तकनीकी माप से खुल सकता है पूरा मामला

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तालाब की लंबाई, चौड़ाई और गहराई का तकनीकी परीक्षण कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी। ग्रामीणों का दावा है कि कई स्थानों पर महज 3 से 4 इंच तक ही खुदाई की गई है, जबकि रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर कार्य दर्शाया गया है।

जांच की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि निम्न बिंदुओं की गहन जांच की जाए—

  • कार्य से संबंधित मस्टर रोल और मजदूरों की उपस्थिति का सत्यापन।
  • मजदूरों को किए गए भुगतान का मिलान।
  • माप पुस्तिका (Measurement Book - MB) की जांच।
  • स्वीकृत राशि और वास्तविक कार्य का भौतिक सत्यापन।
  • कार्य में खर्च की गई राशि का लेखा परीक्षण।

योजना के उद्देश्य पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। लेकिन यदि विकास कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार होगा तो योजना के मूल उद्देश्य प्रभावित होंगे और आम लोगों का भरोसा कमजोर पड़ेगा।

प्रशासनिक कार्रवाई पर निगाहें

मामले के सामने आने के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई संभव हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।