प्रशिक्षण कार्यक्रम में पोलमी, बोड़ला, कुकदूर, भंगीटोला एवं लखनपुर के किसानों को शामिल किया गया। राज्य के विभिन्न केन्द्रों से आए वैज्ञानिकों ने मधुमक्खी पालन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान मधुमक्खियों के प्रकार, फूल प्रबंधन, रख-रखाव, उपकरणों का उपयोग, उपयुक्त स्थान का चयन, शहद निष्कर्षण, पैकेजिंग एवं विपणन जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। साथ ही प्रतिभागियों को शहद प्रसंस्करण केन्द्र का भ्रमण भी कराया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि मधुमक्खियां परागण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती हैं, जिससे फल, सब्जी और दलहनी फसलों की पैदावार बढ़ती है। मधुमक्खी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है, जो किसानों, महिलाओं और भूमिहीन परिवारों के लिए स्वरोजगार का बेहतर विकल्प बन सकता है।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. ऋचा मिश्रा, डॉ. असीत कुमार मिश्रा तथा वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने 28 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के इंजी. टी.एस. सोनवानी, डॉ. बी.एस. परिहार, डॉ. एन.सी. बंजारा एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. सी.पी. राहंगडाले सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि आधारित आय के नए स्रोत विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।