बाल मधुमेह की समय पर पहचान और प्रबंधन के लिए कवर्धा में उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित

कवर्धा में स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में बाल मधुमेह यानी टाइप-1 डायबिटीज की समय पर पहचान और प्रबंधन को लेकर उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में स्वास्थ्य कर्मियों को बच्चों में मधुमेह के लक्षण, उपचार और जागरूकता संबंधी प्रशिक्षण दिया गया।

May 13, 2026 - 19:16
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बाल मधुमेह की समय पर पहचान और प्रबंधन के लिए कवर्धा में उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कवर्धा में बच्चों में बढ़ते मधुमेह, विशेषकर टाइप-1 डायबिटीज यानी बाल मधुमेह की समय पर पहचान, उपचार और प्रभावी प्रबंधन को लेकर एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों को बाल मधुमेह के शुरुआती लक्षणों और उसके प्रबंधन के प्रति प्रशिक्षित करना था।

कार्यशाला में जिले के ग्रामीण सेक्टर सुपरवाइजर, एलएचवी तथा आरबीएसके (चिरायु) टीम सहित कुल 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य कर्मियों को बच्चों में मधुमेह की पहचान, उपचार, परामर्श और सामुदायिक जागरूकता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।

यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ अक्षय शक्ति तिवारी ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को टाइप-1 डायबिटीज के प्रारंभिक लक्षणों की शीघ्र पहचान और समयानुकूल उपचार के बारे में तकनीकी जानकारी देना है, ताकि गांव और समुदाय स्तर पर बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा टाइप-1 डायबिटीज की पहचान, उपचार एवं प्रबंधन, काउंसलिंग, रोगी सहायता समूहों की भूमिका, समुदाय आधारित जागरूकता रणनीतियां तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं पारिवारिक सहयोग जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने समूह गतिविधियों और अनुभव साझा करते हुए विषय को गहराई से समझा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी देवेंद्र कुमार तूरे ने इस पहल को बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और सही उपचार से बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों को सामान्य जीवन जीने में सहायता मिल सकती है।

प्रशिक्षण का संचालन यूनिसेफ की टीम द्वारा स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में जिला नोडल अधिकारी एनसीडी डॉ. हर्षित तुवानी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक अनुपमा तिवारी, जिला सलाहकार आकांक्षा लिखार और अस्पताल सलाहकार अरुण पवार का विशेष सहयोग रहा।

विशेषज्ञों ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज के कई शुरुआती लक्षण होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार भूख लगना, अचानक वजन कम होना, कमजोरी, थकान, धुंधला दिखाई देना, घाव का देर से भरना और बच्चों के व्यवहार में चिड़चिड़ापन शामिल हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बच्चों के खानपान और जीवनशैली पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, मीठे पेय पदार्थों से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच से मधुमेह जैसी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

कार्यशाला के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों को बाल मधुमेह के प्रति संवेदनशील बनाने और समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया, ताकि बच्चों को समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।