गौरेला में आयुर्वेद का वैश्विक संदेश — नीदरलैंड की मेहमान को दी गई वैज्ञानिक जानकारी

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड में ग्रामीण पर्यटन के बीच आयुर्वेद के वैश्विक प्रचार की अनूठी पहल देखने को मिली, जहां नीदरलैंड से आई विदेशी मेहमान को त्रिदोष से पंचकर्म तक आयुर्वेद की वैज्ञानिक जानकारी दी गई।

Jan 19, 2026 - 13:28
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गौरेला में आयुर्वेद का वैश्विक संदेश — नीदरलैंड की मेहमान को दी गई वैज्ञानिक जानकारी

  UNITED NEWS OF ASIA. अवास कैवर्त / गौरेला–पेंड्रा–मरवाही। गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले से आयुर्वेद के वैश्विक प्रचार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। गौरेला विकासखंड के ग्राम लमना स्थित विलेज स्टे में एक विशेष आयुर्वेदिक परिचय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें नीदरलैंड से आई विदेशी मेहमान जोहान्ना हेरमीना को भारत की प्राचीन एवं वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की विस्तृत जानकारी दी गई।

यह कार्यक्रम आवाज़ आयुर्वेद संगठन के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ–साथ आयुर्वेद की वैज्ञानिकता, उपयोगिता और जीवनशैली आधारित उपचार प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना था। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि संतुलित और स्वस्थ जीवन जीने की संपूर्ण प्रणाली है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित आयुर्वेद विशेषज्ञों ने त्रिदोष सिद्धांत — वात, पित्त और कफ — की विस्तृत व्याख्या की। साथ ही पंचकर्म चिकित्सा, आहार-विहार, दिनचर्या और ऋतुचर्या जैसे आयुर्वेदिक सिद्धांतों की वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए उनके दैनिक जीवन में उपयोग को समझाया गया। चिकित्सकों ने बताया कि आयुर्वेद रोग होने के बाद इलाज करने की बजाय रोग से पहले शरीर और मन को संतुलित रखने पर बल देता है।

इस अवसर पर डॉ. सोमेश कुशवाहा, डॉ. संदीप साह, डॉ. विवेक साहू, डॉ. दीपा साहू, फार्मासिस्ट पूरन सिंह आयम, औषधालय सेवक अनिल कुमार यदु एवं पीटीएस संतोष यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर विदेशी मेहमान को आयुर्वेद के व्यावहारिक और वैज्ञानिक पहलुओं की सरल भाषा में जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंतर्गत विदेशी मेहमान को शासकीय आयुर्वेद औषधालय बगरा का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्हें सरकारी आयुर्वेदिक सेवाओं, औषध निर्माण प्रक्रिया और उपचार पद्धतियों की जानकारी दी गई। इसी दौरान डॉ. दीपा साहू के नेतृत्व में नाड़ी स्वेदन थेरेपी का प्रदर्शन किया गया, जिसमें शरीर शोधन, मांसपेशियों के शिथिलीकरण और दर्द निवारण जैसे लाभों को विस्तार से समझाया गया।

नीदरलैंड से आई मेहमान जोहान्ना हेरमीना ने आयुर्वेद को प्राकृतिक, सुरक्षित और प्रभावी चिकित्सा पद्धति बताते हुए कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश में इस प्रकार के आयोजन भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं।

आवाज़ आयुर्वेद संगठन की यह पहल आयुर्वेद के अंतरराष्ट्रीय प्रचार–प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और अनुकरणीय कदम मानी जा रही है।