एथेनॉल प्लांट से जल संकट की आशंका, सामाजिक संगठनों ने मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन
रायगढ़ जिले में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर जल संकट की आशंका जताते हुए विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा है। संगठनों ने परियोजना की स्वीकृति प्रक्रिया की जांच कर अनुमति निरस्त करने तथा जल एवं पर्यावरणीय प्रभावों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l जिले में प्रस्तावित एथेनॉल उद्योगों को लेकर जल संसाधनों पर संभावित प्रभाव और भविष्य में जल संकट की आशंका को लेकर सामाजिक संगठनों ने राज्य शासन का ध्यान आकर्षित किया है। रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़, जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा और जन चेतना संगठन के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर ग्राम सरायपाली, विकासखंड घरघोड़ा में स्थापित किए जा रहे नवदुर्गा फ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड के एथेनॉल प्लांट की अनुमति प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
ज्ञापन में संगठनों ने आरोप लगाया है कि परियोजना के लिए दी गई स्वीकृतियों में जल संसाधनों पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं किया गया है। प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रस्तावित उद्योग की परियोजना रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन 100 केएलपीडी एथेनॉल उत्पादन किया जाएगा, जिसके लिए लगभग 571 केएलपीडी पानी की आवश्यकता होगी। उनका मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में जल उपयोग भविष्य में क्षेत्र के जल स्रोतों पर दबाव बढ़ा सकता है।
संगठनों ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि एथेनॉल उत्पादन प्रक्रिया में पानी की खपत को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंताएं व्यक्त की जाती रही हैं। उनका कहना है कि औद्योगिक परियोजनाओं को अनुमति देते समय जल उपलब्धता, भूजल पुनर्भरण क्षमता और स्थानीय आबादी की भविष्य की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित उद्योग क्षेत्र के आसपास पहले से ही कई इस्पात एवं अन्य औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जो केलो जलाशय सहित विभिन्न जल स्रोतों पर निर्भर हैं। ऐसे में एक और बड़े जल उपभोग वाले उद्योग के शुरू होने से क्षेत्र में जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है। संगठनों का दावा है कि इससे भूजल स्तर प्रभावित हो सकता है और लंबे समय में पेयजल उपलब्धता की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि जिले में भूजल स्तर में गिरावट को लेकर समय-समय पर रिपोर्टें सामने आती रही हैं। ऐसी स्थिति में जल संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग को ध्यान में रखते हुए नई औद्योगिक परियोजनाओं का गहन मूल्यांकन आवश्यक है।
ज्ञापन के माध्यम से सामाजिक संगठनों ने राज्य शासन से मांग की है कि परियोजना की अनुमति प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए, जल एवं पर्यावरणीय प्रभावों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए तथा जनहित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने परियोजना को दी गई स्वीकृतियों की समीक्षा कर उचित निर्णय लेने का आग्रह किया है।
हालांकि, इस मामले में परियोजना प्रबंधन या संबंधित शासकीय विभागों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जल उपयोग और पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़े दावों की पुष्टि तकनीकी अध्ययन और सक्षम प्राधिकरणों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में अब इस विषय पर शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।