मंत्रिपरिषद ने “विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़” के प्रारूप को मंजूरी दी। भारत सरकार के अधिनियम 2025 के अनुरूप लागू की जा रही इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी।
योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण आधारभूत संरचना निर्माण, आजीविका परिसंपत्तियों का विकास तथा टिकाऊ रोजगार सृजन से जुड़े कार्य कराए जाएंगे। इसके साथ ही ग्राम पंचायत आधारित समेकित विकास, विभिन्न विभागीय योजनाओं के अभिसरण तथा पीएम गति शक्ति से समन्वय को भी बढ़ावा मिलेगा। योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तकनीकों और आधुनिक निगरानी प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। योजना में केंद्र और राज्य सरकार के व्यय का अनुपात 60:40 रहेगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना को भी स्वीकृति दी गई। इस योजना के तहत हथकरघा, बुनाई-सिलाई और हस्तशिल्प जैसे सृजन केंद्र, दलहन-तिलहन प्रसंस्करण इकाइयां, राइस मिल, डेयरी, कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत केंद्र और अटल डिजिटल केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उत्पादन, प्रसंस्करण, सेवा और विपणन गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है, जिससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। योजना के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
मंत्रिपरिषद ने “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” को भी मंजूरी दी। इस नीति के तहत कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट और अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें कम्प्रेस्ड बायोगैस में परिवर्तित किया जाएगा।
नई नीति से अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी और जैव उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार के अनुसार छत्तीसगढ़ में प्रतिवर्ष लगभग पांच लाख टन कम्प्रेस्ड बायोगैस उत्पादन की संभावना है। नीति के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाया गया है।
इन निर्णयों से ग्रामीण विकास, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।