ई-वे बिल के नए नियमों पर व्यापारियों को मिली रीयल-टाइम ट्रेनिंग, नियमों की सही जानकारी ही व्यापार का सुरक्षा कवच: सतीश थौरानी
छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और छत्तीसगढ़ सीमेंट मर्चेंट्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में ई-वे बिल और बिल-टू-शिप-टू से जुड़े नए जीएसटी नियमों की जानकारी दी गई। चेम्बर अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि नियमों की सही जानकारी व्यापारियों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है और तकनीक व नियमों को अपनाकर व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर स्थित चौधरी देवीलाल उद्योग व्यापार भवन में छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज एवं छत्तीसगढ़ सीमेंट मर्चेंट्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में जीएसटी के ई-वे बिल और बिल-टू-शिप-टू से संबंधित नए नियमों पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य व्यापारियों को हाल ही में लागू किए गए प्रावधानों की जानकारी देना तथा उनके व्यावहारिक उपयोग को सरल बनाना था।
कार्यशाला में बड़ी संख्या में सीमेंट व्यवसायियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने ई-वे बिल से जुड़े तकनीकी, कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही व्यापारियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
कार्यक्रम में हाल ही में भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में कनाडा के व्यापारिक दौरे से लौटे चेम्बर अध्यक्ष सतीश थौरानी का छत्तीसगढ़ सीमेंट मर्चेंट्स एसोसिएशन की ओर से स्वागत और सम्मान किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में व्यापार को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने के लिए नियमों की सही जानकारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जीएसटी और ई-वे बिल से जुड़े प्रावधानों को समझकर ही व्यापारी अनावश्यक परेशानियों और दंडात्मक कार्रवाई से बच सकते हैं।
कार्यशाला में सीए चेतन तारवानी ने बताया कि ई-वे बिल के नियमों में किए जा रहे बदलावों का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी को रोकना है। हालांकि जानकारी के अभाव में कई बार ईमानदार व्यापारी भी तकनीकी त्रुटियों के कारण परेशानी में पड़ जाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से बिल-टू-शिप-टू लेनदेन में पार्ट-ए और पार्ट-बी की प्रविष्टियों को सही तरीके से भरने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिलिंग और डिलीवरी पते में छोटी सी गलती भी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को प्रभावित कर सकती है।
सीए विजय गोलछा ने ई-वे बिल की वैधता अवधि, समय पर एक्सटेंशन और सटीक डेटा एंट्री के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि वाहन खराब होने या अन्य कारणों से परिवहन में देरी होती है तो समय रहते ई-वे बिल की वैधता बढ़ाना आवश्यक है, अन्यथा जुर्माने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने सीमेंट व्यापार में मल्टीपल डिलीवरी जैसी जटिल परिस्थितियों में दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने की सलाह भी दी।
सतीश थौरानी ने अपने संबोधन में कनाडा दौरे के अनुभव साझा करते हुए कहा कि विकसित देशों में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पूरी तरह तकनीक आधारित हैं। यदि छत्तीसगढ़ के व्यापारी भी आधुनिक तकनीकों और नियमों को अपनाएं तो व्यापारिक संभावनाएं कई गुना बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि चेम्बर भविष्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक व्यवस्थाओं के अध्ययन और उनके स्थानीय अनुप्रयोग पर भी कार्य करेगा।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तरी सत्र में व्यापारियों ने दैनिक बिलिंग, ई-वे बिल की वैधता समाप्त होने तथा मल्टीपल डिलीवरी से संबंधित समस्याएं रखीं। विशेषज्ञों ने नियमों के अनुरूप सभी सवालों के समाधान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन जसप्रीत सिंह सलूजा ने किया। कार्यशाला में चेम्बर पदाधिकारियों, सीमेंट मर्चेंट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में व्यापारियों की उपस्थिति रही।