विकसित भारत के लिए शिक्षा और उद्योग का मजबूत गठजोड़ जरूरी: बृजमोहन अग्रवाल
मुंबई में आयोजित ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और उद्योगों के बीच मजबूत तालमेल से ही हासिल किया जा सकता है। बैठक में कौशल विकास, इंटर्नशिप, युवा संगम कार्यक्रम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर व्यापक चर्चा हुई।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l मुंबई में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के विभिन्न पहलुओं पर देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों एवं सरकारी प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश के उच्च शिक्षण संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रहकर उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करें
बैठक के दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने शिक्षा और उद्योग जगत के बीच मजबूत एवं संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक उच्च शिक्षा संस्थानों को नवाचार, अनुसंधान और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे छात्रों को बेहतर अवसर मिलने के साथ-साथ उद्योगों को प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।
बैठक में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की भूमिका पर भी चर्चा हुई। इस दौरान ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान के अंतर्गत आईआरसीटीसी द्वारा संचालित ‘युवा संगम’ कार्यक्रम को एक सफल पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि यह कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपरा, तकनीकी प्रगति और विकास मॉडल को समझने का अवसर प्रदान कर रहा है। अब तक पांच सत्रों में 5,200 से अधिक छात्र इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो चुके हैं, जबकि इसके छठे चरण की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने छात्रों के लिए इंटर्नशिप को अनिवार्य बनाए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका कहना था कि व्यावहारिक अनुभव के बिना शिक्षा अधूरी है। आईआरसीटीसी सहित कई नवरत्न कंपनियां वैधानिक प्रशिक्षुता अधिनियम और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत युवाओं को प्रशिक्षण के अवसर प्रदान कर रही हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान आईआरसीटीसी द्वारा 75 प्रशिक्षुओं की नियुक्ति की योजना भी साझा की गई
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि अनिवार्य इंटर्नशिप लागू होने पर उद्योगों की क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है। इस चुनौती के समाधान के लिए पीएसयू, एमएसएमई, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने, हाइब्रिड इंटर्नशिप मॉडल अपनाने तथा प्रोजेक्ट आधारित प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करने जैसे सुझाव सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण संबंधी उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
बैठक की अध्यक्षता डॉ. डी. पुरंदेश्वरी ने की। इसमें अनुराग सिंह ठाकुर, बांसुरी स्वराज, हेमांग जोशी, ई. टी. मोहम्मद बशीर, सौगात राय, श्रीकांत एकनाथ शिंदे, इंद्रा हंग सुब्बा, प्रदीप कुमार वर्मा, मीनाक्षी जैन और सागरिका घोष सहित कई सांसद उपस्थित रहे। इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय, रेल मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार और देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी विधेयक पर अपने सुझाव साझा किए। बैठक को विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में शिक्षा और उद्योग के समन्वय को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच माना गया l