दुर्ग में बायोगैस संयंत्रों एवं फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण, स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों की समीक्षा

दुर्ग जिले में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत बायोगैस संयंत्रों एवं फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने संचालन सुधारने और अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

Jun 15, 2026 - 17:52
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दुर्ग में बायोगैस संयंत्रों एवं फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण, स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों की समीक्षा

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल l दुर्ग जिले में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत गोबरधन योजना एवं अन्य अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं की प्रगति का निरीक्षण किया गया। इस दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग द्वारा ग्राम पंचायत भटगांव में स्थापित बायोगैस संयंत्र का अवलोकन किया गया और उसके संचालन से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली गई।

यह बायोगैस संयंत्र वर्ष 2020 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत स्थापित किया गया था, जिसकी कुल लागत 6.47 लाख रुपये है। वर्तमान में इस संयंत्र से लगभग 05 परिवारों को घरेलू गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को स्वच्छ ऊर्जा का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा जिले के अन्य ग्राम पंचायतों जैसे सिकोला एवं पाटन में भी इसी प्रकार के बायोगैस संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संबंधित जनपद एवं पंचायत स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बायोगैस संयंत्रों का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रबंधन संबंधी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ सतत रूप से ग्रामीणों को मिलता रहे।

इसके पश्चात ग्राम पंचायत पतोरा (जनपद पंचायत पाटन) में स्थापित बायोगैस संयंत्र का भी निरीक्षण किया गया। यह संयंत्र वर्ष 2023 में क्रेडा विभाग द्वारा 7.28 लाख रुपये की लागत से स्थापित किया गया है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत जोगीगुफा एवं कंडरका धमधा में भी क्रेडा द्वारा इसी प्रकार के संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

पतोरा में स्थित फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों को बताया गया कि कलेक्टर के निर्देशानुसार प्रतिदिन दो ट्रिप डी-स्लजिंग का कार्य सुनिश्चित किया जा रहा है। इस प्लांट से उत्पन्न होने वाले “सोना खाद” के विक्रय हेतु ग्राम पंचायत द्वारा 10 रुपये प्रति किलोग्राम दर निर्धारित की गई है, जिसमें वर्तमान में 40 क्विंटल से अधिक खाद उपलब्ध है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा निर्देश दिए गए कि इस जैविक खाद के विपणन के लिए सहकारिता, उद्यानिकी, कृषि एवं वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि इसका व्यापक स्तर पर उपयोग सुनिश्चित हो सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिले।

इसके अतिरिक्त प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट पतोरा का भी निरीक्षण किया गया, जिसमें प्रतिदिन एकत्रित किए जा रहे प्लास्टिक अपशिष्ट, उसके प्रसंस्करण एवं विक्रय की प्रक्रिया की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि हर 15 दिन में अपशिष्ट प्लास्टिक का नियमित विक्रय सुनिश्चित किया जाए तथा सभी ग्राम पंचायतों से प्लास्टिक संग्रहण का नियमित प्रतिवेदन प्राप्त किया जाए।

अधिकारियों ने सभी संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों एवं तकनीकी स्टाफ को निर्देशित किया कि सभी इकाइयों का नियमित संचालन, रखरखाव और निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से पूरा किया जा सके और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण विकास को भी गति मिल सके।