डॉक्टर्स की मेहनत से मौत के मुंह से वापस लौटी नवजात, दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में मिला नया जीवन
दंतेवाड़ा जिला अस्पताल के डॉक्टरों और एसएनसीयू स्टाफ की अथक मेहनत से गंभीर अवस्था में भर्ती एक नवजात बच्ची को नया जीवन मिला। सात दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट और लगभग एक महीने के उपचार के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटी।
UNITED NEWS OF ASIA. दंतेवाड़ा l दंतेवाड़ा जिला अस्पताल के चिकित्सकों और विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) की टीम ने अपनी विशेषज्ञता, समर्पण और निरंतर प्रयासों से एक गंभीर रूप से बीमार नवजात बच्ची को नया जीवन दिया है। यह सफलता न केवल आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की प्रभावशीलता को दर्शाती है, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा और टीमवर्क का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।
गीदम विकासखंड के पदमेटा स्कूलपारा निवासी मंजू अलामी ने 10 मई को एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद ही नवजात की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्ची को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी, शरीर में शुगर का स्तर लगातार गिर रहा था और उसे बार-बार झटके आ रहे थे। उसकी स्थिति इतनी नाजुक थी कि उसे किसी बड़े चिकित्सा संस्थान में रेफर करना भी जोखिम भरा माना गया।
ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नवजात को विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई में भर्ती किया। उपलब्ध संसाधनों और चिकित्सा विशेषज्ञता के आधार पर अस्पताल में ही उसका उपचार शुरू किया गया। बच्ची को लगातार सात दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और इस दौरान चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ ने चौबीसों घंटे उसकी निगरानी की।
उपचार के दौरान नवजात की प्रत्येक चिकित्सकीय आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया गया। डॉक्टरों की सतत निगरानी और सटीक उपचार का सकारात्मक परिणाम सात दिनों बाद दिखाई देने लगा, जब बच्ची की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उसे वेंटिलेटर से हटा लिया गया। इसके बाद भी उसे विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया ताकि वह पूरी तरह स्वस्थ हो सके।
करीब एक महीने तक चले उपचार और देखभाल के बाद 13 जून को नवजात बच्ची को पूर्णतः स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बच्ची के स्वस्थ होकर घर लौटने से उसके परिजनों में खुशी का माहौल है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अजय रामटेके ने इस उपलब्धि को जिला अस्पताल के नवजात चिकित्सा विभाग की महत्वपूर्ण सफलता बताया। उन्होंने कहा कि गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात को वेंटिलेटर सपोर्ट के माध्यम से सफलतापूर्वक नया जीवन देना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और चिकित्सकों के समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने पूरी चिकित्सा टीम को इस सफलता के लिए बधाई दी।
दंतेवाड़ा जिला अस्पताल की यह उपलब्धि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता तथा विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल की क्षमता को भी दर्शाती है। यह सफलता उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिन्हें गंभीर परिस्थितियों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता होती है।