धमतरी में बाल मधुमेह पीड़ित बच्चों के लिए रोगी सहायता समूह बैठक, उपचार और जागरूकता पर जोर
धमतरी में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा यूनिसेफ और एमसीसीआर ट्रस्ट के सहयोग से टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों के लिए रोगी सहायता समूह बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम में बच्चों को डायबिटीज प्रबंधन किट वितरित की गई और विशेषज्ञों ने इंसुलिन प्रबंधन, संतुलित आहार, नियमित जांच और स्कूल सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l धमतरी जिले में टाइप-1 डायबिटीज यानी बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों के लिए रोगी सहायता समूह बैठक का आयोजन किया गया। जिला स्वास्थ्य समिति धमतरी द्वारा यूनिसेफ छत्तीसगढ़ और एमसीसीआर ट्रस्ट के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 25 बाल मधुमेह मरीजों सहित उनके 35 परिजन और देखभालकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और अभिभावकों को बीमारी के प्रति जागरूक करना तथा बेहतर उपचार और देखभाल के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना था।
बैठक के दौरान बच्चों को जिला प्रशासन की ओर से डायबिटीज प्रबंधन किट वितरित की गई। इस किट में इंसुलिन पेन, ग्लूकोमीटर, शुगर जांच स्ट्रिप, लैंसेट और नीडल शामिल थे। विशेषज्ञों ने बच्चों और उनके अभिभावकों को नियमित शुगर जांच और समय पर इंसुलिन लेने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के लिए नियमित चिकित्सा जांच बेहद जरूरी होती है। इसके तहत फंडस एग्जामिनेशन और लिवर फंक्शन टेस्ट जैसी जांचों की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि बीमारी से जुड़ी संभावित जटिलताओं की समय रहते पहचान की जा सके।
मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद महापौर रामू रोहरा ने बच्चों के लिए नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पौष्टिक भोजन, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधियां बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा होनी चाहिए। उन्होंने Continuous Glucose Monitoring यानी CGM डिवाइस की उपयोगिता पर भी चर्चा की और कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शुगर मॉनिटरिंग को अधिक आसान और प्रभावी बनाया जा सकता है।
जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञों ने टाइप-1 डायबिटीज से जुड़े परहेज, इंसुलिन प्रबंधन, संतुलित आहार और संक्रमण से बचाव के उपायों पर जानकारी दी। विशेषज्ञों ने कहा कि सही उपचार, अनुशासित जीवनशैली और परिवार के सहयोग से बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चे भी सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में ऐसे बच्चों के लिए सहयोगात्मक और संवेदनशील वातावरण तैयार करना जरूरी है। बच्चों की पढ़ाई, मानसिक आत्मविश्वास और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने में शिक्षकों और स्कूल प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
बैठक के दौरान अभिभावकों ने बच्चों की देखभाल, स्कूल की चुनौतियों, खानपान, इंसुलिन लेने में आने वाली कठिनाइयों और सामाजिक दबाव जैसी समस्याओं को साझा किया। विशेषज्ञों ने संवाद के माध्यम से उनकी शंकाओं का समाधान किया और उन्हें बीमारी के बेहतर प्रबंधन के तरीके बताए।
यूनिसेफ नई दिल्ली से एनसीडी सलाहकार डॉ. सोना देशमुख ने बच्चों में बढ़ते टाइप-1 डायबिटीज के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए समय पर पहचान, नियमित फॉलो-अप, संतुलित आहार और फिजिकल एक्टिविटी की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ, एमसीसीआर ट्रस्ट और जिला प्रशासन के कई अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि परिवार, स्कूल, स्वास्थ्य विभाग और समाज के सामूहिक सहयोग से बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों को बेहतर, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन दिया जा सकता है।