जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष Nagendra Negi ने आरोप लगाया कि रायगढ़ जिले में वर्षों से पुनर्वास नीति केवल फाइलों तक सीमित है, जबकि प्रभावित ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए किसानों और आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन को कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले करने की तैयारी कर रहा है।
नेगी ने कहा कि एसईसीएल की पुनर्वास नीति वर्षों से लंबित है, लेकिन जिला भू-अर्जन अधिकारी इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बिना उचित पुनर्वास और मुआवजे के ग्रामीणों को उजाड़ने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रभावित लोगों के भविष्य और आजीविका की चिंता किए बिना परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
कांग्रेस ने विशेष रूप से केलो नदी के संभावित डायवर्जन को लेकर भी चिंता जताई है। नगेन्द्र नेगी ने कहा कि केलो नदी रायगढ़ जिले की जीवनरेखा है और इसके प्राकृतिक प्रवाह से छेड़छाड़ आने वाले समय में गंभीर जल संकट पैदा कर सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कुछ कंपनियों के मुनाफे के लिए पूरे जिले की जनता के जल संसाधनों और कृषि व्यवस्था को खतरे में डाला जा सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समान कोयला उपलब्धता के बावजूद अलग-अलग गांवों के किसानों के लिए अलग-अलग मुआवजा दरें तय की जा रही हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि यदि किसान अपनी सहमति देते हैं तो सभी प्रभावितों को एक समान और उचित बाजार मूल्य पर मुआवजा दिया जाए।
कांग्रेस ने भूमिहीन मजदूरों और आदिवासी समुदायों के पुनर्वास के लिए स्पष्ट और ठोस नीति बनाने की मांग भी उठाई है। पार्टी का कहना है कि गांव उजड़ने की स्थिति में इन समुदायों की आजीविका पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी। इसलिए जनसुनवाई से पहले पुनर्वास की पूरी व्यवस्था और वैकल्पिक स्थान सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
नगेन्द्र नेगी ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ग्रामीणों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो कांग्रेस पार्टी तमनार सहित पूरे जिले में उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि बिना पुनर्वास, पर्यावरण सुरक्षा और उचित मुआवजे की गारंटी के जनसुनवाई होने नहीं दी जाएगी।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वर्तमान में प्रस्तावित जनसुनवाई नियमों और जनभावनाओं के विपरीत जबरन कराई जा रही है। पार्टी ने प्रशासन से मांग की है कि पहले सभी प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया जाए, उसके बाद ही किसी प्रकार की जनसुनवाई आयोजित की जाए।