हसदेव में अडानी के लिए फिर पेड़ों की कटाई की तैयारी, कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खनन परियोजना को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने केते एक्सटेंशन कोल माइनिंग परियोजना के लिए वन भूमि के उपयोग की अनुमति देकर लाखों पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ कर दिया है, जिससे पर्यावरण और आदिवासी समुदायों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खनन परियोजना को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर उद्योगपति गौतम अडानी को लाभ पहुंचाने के लिए हसदेव क्षेत्र के जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश के महत्वपूर्ण वन क्षेत्र पर संकट उत्पन्न हो गया है।
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने जारी बयान में कहा कि राज्य सरकार ने केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइनिंग एवं पिट हेड कोल वॉशरी परियोजना के लिए 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में परिवर्तित करने की अनुमति प्रदान की है। उनके अनुसार राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया, जहां से भी इसे मंजूरी मिल चुकी है।
कांग्रेस का दावा है कि परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र में सात लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। पार्टी का कहना है कि हसदेव अरण्य मध्य भारत के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में से एक है और इसे "लंग्स जोन" के रूप में भी जाना जाता है। ऐसे में बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
वंदना राजपूत ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र के आसपास रामगढ़ की पहाड़ियां, प्राचीन नाट्यशाला, सीता गुफा, जानकी रसोई तथा भगवान राम के वनगमन से जुड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक स्मृतियां स्थित हैं। उनका कहना है कि खनन गतिविधियों से इन स्थलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि हसदेव अरण्य का संबंधित क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां स्थानीय आदिवासी समुदाय लंबे समय से नई खदानों का विरोध कर रहे हैं। पार्टी के अनुसार कई ग्राम सभाओं ने परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए हैं और स्थानीय स्तर पर लगातार आंदोलन भी जारी है।
बयान में कहा गया है कि क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि बड़े पैमाने पर खनन कार्य शुरू होता है तो जंगल, जल स्रोत, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और आदिवासियों की पारंपरिक आजीविका प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से हाथियों और अन्य वन्यजीवों के आवागमन तथा निवास क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
कांग्रेस ने राज्य सरकार से स्थानीय समुदायों की आपत्तियों और पर्यावरणीय चिंताओं को गंभीरता से लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है तथा आदिवासी समुदायों के अधिकारों और हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में खनन परियोजनाओं को लेकर पिछले कई वर्षों से पर्यावरण, वन संरक्षण और स्थानीय अधिकारों को लेकर बहस जारी है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को प्रदेश की जनता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए सरकार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।