बाल अधिकार आयोग के हस्तक्षेप से दो साल बाद फिर शुरू होगी दो बालिकाओं की पढ़ाई

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के त्वरित हस्तक्षेप से दो वर्षों से शिक्षा से वंचित दो बालिकाओं को न्याय मिला। विशेष खंडपीठ की सुनवाई के बाद विद्यालय प्रबंधन ने बकाया शुल्क माफ करने, टीसी और परीक्षा परिणाम जारी करने के साथ दोनों बालिकाओं को 21-21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई।

Jun 25, 2026 - 13:58
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बाल अधिकार आयोग के हस्तक्षेप से दो साल बाद फिर शुरू होगी दो बालिकाओं की पढ़ाई

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के त्वरित हस्तक्षेप से दो वर्षों से शिक्षा से वंचित दो बालिकाओं को न्याय मिला है। आयोग की पहल पर विशेष खंडपीठ (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में मामले की सुनवाई की गई, जिसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने बकाया शुल्क माफ करने, स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) और परीक्षा परिणाम जारी करने के साथ दोनों बालिकाओं की आगे की शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया।

यह मामला आयोग के संज्ञान में समाचार पत्र और प्राप्त आवेदन के माध्यम से आया था। जानकारी के अनुसार दोनों बालिकाएं पिछले लगभग दो वर्षों से शिक्षा के अधिकार से वंचित थीं। स्थानांतरण प्रमाण-पत्र और अन्य आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उनका दूसरे विद्यालय में प्रवेश नहीं हो पा रहा था, जिससे उनकी पढ़ाई पूरी तरह रुक गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के निर्देश पर विशेष खंडपीठ का गठन किया गया और प्रकरण की त्वरित सुनवाई शुरू की गई। आयोग के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों से पता चला कि बालिकाओं के पिता ने आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या कर ली थी, जबकि उनकी माता गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। कठिन पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के चलते परिवार बालिकाओं की शिक्षा अन्य स्थान पर जारी रखना चाहता था, लेकिन आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा था।

सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों की बात गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुनी। बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए आयोग ने आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास किया। आयोग की पहल पर विद्यालय प्रबंधन ने दोनों छात्राओं का बकाया शुल्क पूरी तरह माफ करने, उनका परीक्षा परिणाम और स्थानांतरण प्रमाण-पत्र शीघ्र उपलब्ध कराने पर सहमति व्यक्त की।

इसके साथ ही नई जगह पर प्रवेश और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विद्यालय प्रबंधन ने दोनों बालिकाओं को 21-21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वेच्छा से प्रदान करने का भी निर्णय लिया। यह सहायता निर्धारित समय सीमा के भीतर परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी।

आवेदिका ने आयोग के समक्ष इस समाधान पर संतोष व्यक्त किया और सहमति प्रदान की। इसके बाद आयोग ने मामले का निराकरण करते हुए उसे नस्तीबद्ध करने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि यह प्रकरण 18 जून को आयोग में दर्ज हुआ था और मात्र एक सप्ताह के भीतर, 24 जून को इसका समाधान कर दिया गया।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा करना और उनके सर्वोत्तम हितों का संरक्षण आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आयोग संवेदनशीलता, संवाद और त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से ऐसे मामलों का मानवीय एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

आवेदिका ने आयोग की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से उनकी दोनों पुत्रियों की शिक्षा दोबारा शुरू हो सकेगी और उनका भविष्य सुरक्षित हो सकेगा। यह मामला शिक्षा के अधिकार की रक्षा और मानवीय दृष्टिकोण से त्वरित न्याय का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया है।