दिल्ली में पीएम आवास योजना के नाम पर बड़ा घोटाला, 69 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा, ED ने दाखिल की चार्जशीट

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली-एनसीआर में पीएम आवास योजना के तहत सस्ते घर दिलाने के नाम पर हुए 69 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में बिल्डर स्वराज सिंह यादव और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।

Jan 10, 2026 - 12:49
 0  12
दिल्ली में पीएम आवास योजना के नाम पर बड़ा घोटाला, 69 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा, ED ने दाखिल की चार्जशीट

UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत सस्ते घर दिलाने के नाम पर हुए एक बड़े घोटाले का प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने खुलासा किया है। ईडी की जांच में करीब 69.02 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) सामने आई है। इस मामले में ईडी ने 9 जनवरी 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट स्थित PMLA स्पेशल कोर्ट में M/s Ocean Seven Buildtech Pvt. Ltd. के प्रमोटर स्वराज सिंह यादव और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

स्वराज सिंह यादव को इससे पहले 13 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर की गई है। इन एफआईआर में गुरुग्राम में पीएम आवास योजना के अंतर्गत शुरू की गई अफोर्डेबल हाउसिंग परियोजनाओं में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और बड़े वित्तीय घोटाले के आरोप दर्ज हैं।

शिकायतों के अनुसार, सैकड़ों होम बायर्स और निवेशकों ने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी इस भरोसे के साथ निवेश की थी कि उन्हें समय पर और सस्ती दरों पर मकान मिलेगा। लेकिन हकीकत यह रही कि करोड़ों रुपये इकट्ठा होने के बावजूद आज तक एक भी घर की डिलीवरी नहीं की गई। इससे कई परिवार गंभीर आर्थिक संकट और मानसिक तनाव में आ गए।

ईडी की जांच में सामने आया कि यह पूरा घोटाला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। घर खरीदारों से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल लग्जरी खर्च, महंगी संपत्तियों की खरीद और निजी लाभ के लिए किया गया। पैसे को छिपाने के लिए शेल कंपनियों के नेटवर्क का सहारा लिया गया, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया जा सके।

जांच में यह भी पाया गया कि कई मामलों में वैध अलॉटमेंट को अवैध तरीके से रद्द कर दिया गया और उन्हीं फ्लैट्स को बाद में ऊंचे दामों पर दोबारा बेचा गया। कुछ सौदों में कानूनी कीमत से ज्यादा रकम नकद में वसूली गई। होम बायर्स को डिफॉल्टर दिखाने के लिए फर्जी और जाली दस्तावेज भी तैयार किए गए।

ईडी ने 5 जनवरी 2026 को इस मामले में 51.57 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन संपत्तियों में गुरुग्राम, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित विला, होटल-रिसॉर्ट, ऑफिस, जमीन और बैंक बैलेंस शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपी देश से बाहर भागने और संपत्तियां बेचने की कोशिश कर रहा था, जिस पर उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया गया।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल अन्य आरोपियों और कंपनियों पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।