मनेंद्रगढ़ में भू-माफियाओं का ‘जमीन बदलो’ खेल, सरकारी कागजों और दलालों के मायाजाल में करोड़ों की हेराफेरी
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में भू-माफियाओं और दलालों की मिलीभगत से सरकारी और निजी जमीनों के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही है। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कर करोड़ों की जमीन को निजी बताकर बेचा जा रहा है, जबकि प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA.प्रदीप पाटकर, कोरिया | मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में भू-माफियाओं और दलालों का ऐसा गठजोड़ सामने आ रहा है, जिसने सरकारी और निजी जमीन के बीच की रेखा ही मिटा दी है। आरोप है कि सुनियोजित तरीके से कभी सरकारी जमीन को निजी और कभी निजी जमीन को सरकारी बताकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे खुलेआम चल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मनेंद्रगढ़ और उसके आसपास के इलाकों में दलालों की पकड़ इतनी मजबूत हो चुकी है कि राजस्व विभाग के नियम-कायदे भी उनके इशारों पर बदल जाते हैं। कलेक्टर कार्यालय और राजस्व शाखाओं में सक्रिय दलालों की मौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं, जिनकी वजह से आम नागरिक न्याय के लिए भटक रहे हैं, जबकि भू-माफिया बेखौफ होकर सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, भू-माफियाओं की नजर शहर से लगे कीमती क्षेत्रों पर टिकी हुई है। चैनपुर और चनवारीडांड क्षेत्र में बेशकीमती सरकारी भूखंडों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी की चर्चाएं तेज हैं। चौघहड़ा और लालपुर में राजस्व दस्तावेजों में काट-छांट कर सरकारी जमीन पर पट्टे जारी करने का खेल चल रहा है। वहीं, मनेंद्रगढ़ की शहरी सीमा से लगी मुख्य मार्गों की जमीनों पर दलालों का कब्जा अब भी बना हुआ है।
भ्रष्टाचार के इस पूरे नेटवर्क का एक प्रमुख उदाहरण ग्राम पंचायत चैनपुर का खसरा क्रमांक 109, विशेष रूप से भूखंड 109/10 को माना जा रहा है। आरोप है कि इस जमीन के रिकॉर्ड में इस तरह की हेराफेरी की गई है कि पट्टे की जमीन को सरकारी और सरकारी जमीन को कागजों में निजी दर्शाने की तैयारी है। यह मामला इस बात का प्रमाण है कि कैसे राजस्व अधिकारी और दलाल मिलकर शासन की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
जानकारों के अनुसार यह पूरा खेल तीन चरणों में होता है। पहले पुराने राजस्व रिकॉर्ड और मिसल बंदोबस्त में हेरफेर कर सरकारी जमीन को खाली या विवादित दिखाया जाता है। इसके बाद बैक-डेट में फर्जी पट्टे तैयार कराए जाते हैं। अंततः रसूखदारों की मदद से जमीन पर कब्जा कर उसे ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि यदि चैनपुर, चनवारीडांड और लालपुर क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों के भूमि नामांतरण और पट्टों की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, तो एक बड़ा भू-घोटाला सामने आ सकता है। अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई करेगा या दलालों का यह ‘जमीन बदलो’ खेल यूं ही चलता रहेगा।