गायत्री गुरुकुल पोड़ी में पांच दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा शिविर, चतुर्थ दिवस योग सत्र में उमड़ी स्वास्थ्य साधकों की भीड़

गायत्री गुरुकुल पोड़ी में आयोजित पांच दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा शिविर के चतुर्थ दिवस प्रातःकालीन योग सत्र में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य साधकों की सहभागिता देखने को मिली। योग, यज्ञ, षट्कर्म एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों से उपचार किया जा रहा है।

Dec 24, 2025 - 17:39
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गायत्री गुरुकुल पोड़ी में पांच दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा शिविर, चतुर्थ दिवस योग सत्र में उमड़ी स्वास्थ्य साधकों की भीड़

 UNITED NEWS OF ASIA. पोंडी, कबीरधाम । गायत्री गुरुकुल पोड़ी में शीतकालीन सत्र के अंतर्गत पतंजलि योग शिक्षकों द्वारा आयोजित पांच दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा शिविर के चतुर्थ दिवस प्रातःकालीन योग सत्र में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य साधकों की उपस्थिति देखने को मिली। यह शिविर 21 दिसंबर से 25 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न रोगों से पीड़ित साधकों को प्राकृतिक एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से उपचार प्रदान किया जा रहा है।

इस शिविर में न केवल कबीरधाम जिले बल्कि छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के साथ-साथ मध्यप्रदेश (उज्जैन) एवं उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में स्वास्थ्य साधक पहुंचे हैं। शिविर में पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से प्रशिक्षित रोगानुसार चिकित्सकों द्वारा साधकों की जांच कर व्यक्तिगत रोगों के अनुसार उपचार एवं योगाभ्यास कराया जा रहा है।

आयोजकों ने बताया कि प्राचीन भारतीय ऋषि-मुनियों द्वारा प्रतिपादित आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति आज भी मानव जीवन को स्वस्थ एवं संतुलित बनाने में सक्षम है। महर्षि चरक, सुश्रुत, पतंजलि, वाग्भट एवं भगवान धन्वंतरि की परंपराओं को आत्मसात करते हुए “आयुर्वेद अर्थात आयु का विज्ञान” को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से इस शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर का प्रमुख उद्देश्य आधुनिक भागदौड़ भरी जीवनशैली से ग्रसित लोगों को योग, यज्ञ एवं संतुलित आहार के माध्यम से स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित करना है।

योग थैरेपी

प्रातःकालीन योग सत्र में स्वामी अशोकानंद द्वारा विभिन्न रोगों से पीड़ित साधकों को रोगानुसार योगाभ्यास कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने योग को समत्व का मार्ग बताया है तथा आयुर्वेद में त्रिदोष—वात, पित्त एवं कफ—के संतुलन को उत्तम स्वास्थ्य का आधार माना गया है।

यज्ञ थैरेपी

यज्ञ चिकित्सक हरिराम साहू द्वारा रोगानुसार विशेष हवन सामग्री से यज्ञ चिकित्सा कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि यज्ञ पूर्णतः वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है, जिसमें प्रयुक्त औषधियां ऊर्जा में परिवर्तित होकर वातावरण को शुद्ध करती हैं, जिससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

षट्कर्म एवं अन्य उपचार

शरीर शोधन हेतु बस्ती, नौली, कपालभाति, नेती एवं त्राटक जैसी षट्कर्म क्रियाएं कराई जा रही हैं। इसके साथ ही कपिंग, शिरोधारा, अक्षी तर्पण, अभ्यंग एवं एक्यूप्रेशर जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों द्वारा भी उपचार किया जा रहा है।

चतुर्थ दिवस के योग सत्र में जनपद पंचायत बोड़ला के उपाध्यक्ष नंद श्रीवास एवं समाजसेवी भगत पटेल विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भारतीय चिकित्सा पद्धति के महत्व को बताते हुए आमजन को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया।

शिविर में पतंजलि योग शिक्षकों सहित गायत्री परिवार के सदस्य एवं बड़ी संख्या में योग साधक सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं