इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा नारी शक्ति का सीधा अपमान है। कांग्रेस प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र तथा व्यापक रूप दिया जाएगा।
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हरीश कवासी ने आंदोलन स्थल पर मौजूद सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता के मद में चूर हो चुकी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने तुगलकी फरमान जारी कर महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस अन्याय के खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगों को हर स्तर पर उठाया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वर्षों से शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफल बना रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आज तक शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार उनके परिश्रम और योगदान को लगातार नजरअंदाज कर रही है।
धरना-प्रदर्शन में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे लंबे समय से पोषण अभियान, टीकाकरण कार्यक्रमों में सहयोग, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों की देखरेख, सर्वे कार्य तथा अन्य विभागीय जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित कर्मचारियों की तरह वेतनमान का लाभ मिलता है और न ही अन्य शासकीय सुविधाएं दी जाती हैं।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि वर्तमान मानदेय महंगाई के अनुरूप बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना लगातार कठिन होता जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि समान कार्य के बावजूद उन्हें सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, बीमा और पदोन्नति जैसी सुविधाओं से वंचित रखा गया है।
इस हड़ताल का सीधा असर कई आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन पर भी पड़ा है। अनेक केंद्रों में ताले लगे रहे, जिससे महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हुई है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों से संबंधित सेवाएं प्रभावित होने की बात भी सामने आई है।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन को राज्य स्तर पर और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
कांग्रेस नेताओं ने आंदोलनरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भरोसा दिलाया कि उनके हक की इस लड़ाई में पार्टी हर संभव सहयोग देगी और उनकी आवाज को मजबूती के साथ सरकार तक पहुंचाया जाएगा।