मुनगाडीह पंचायत में भ्रष्टाचार की जांच शुरू, जिला पंचायत सीईओ ने तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
कोरबा जिले के पाली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मुनगाडीह में 15वें वित्त की राशि में कथित भ्रष्टाचार के मामले में जिला पंचायत सीईओ ने सख्त रुख अपनाया है। पंचायत उप संचालक को जांच के निर्देश दिए गए हैं और तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। मामले में पंचायत के विकास कार्यों में अनियमितता और फर्जी बिलों के जरिए लाखों रुपये के गबन के आरोप लगे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l कोरबा जिले के पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत मुनगाडीह में विकास कार्यों के नाम पर कथित भ्रष्टाचार का मामला अब प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है। पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग में भारी अनियमितता की खबर सामने आने के बाद जिला पंचायत सीईओ ने गंभीरता दिखाते हुए जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। पंचायत उप संचालक को मामले की जांच कर तीन दिवस के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत मुनगाडीह में सरपंच और सचिव पर मिलीभगत कर शासन से प्राप्त विकास राशि के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। आरोप है कि गांव में विभिन्न निर्माण और मरम्मत कार्यों के नाम पर फर्जी बिल और कागजी रिकॉर्ड तैयार कर लाखों रुपये की राशि निकाल ली गई। इनमें स्कूल शौचालय निर्माण, अतिरिक्त कक्ष मरम्मत, नाली निर्माण और सफाई, पेयजल व्यवस्था, सबमर्सिबल पंप और पाइपलाइन विस्तार जैसे कार्य शामिल बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन कार्यों का भुगतान किया गया, उनमें कई कार्य जमीन पर दिखाई ही नहीं दे रहे हैं। कुछ स्थानों पर अधूरे निर्माण और खराब गुणवत्ता के काम की भी शिकायत सामने आई है। मामला मीडिया में उजागर होने के बाद जिला पंचायत प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया।
जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग ने पंचायत उप संचालक को निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा है कि पंचायतों को जारी विकास राशि में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में सरपंच और सचिव दोषी पाए जाते हैं तो पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 और 92 के तहत कार्रवाई करते हुए राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी।
पंचायत उप संचालक द्वारा पाली जनपद पंचायत सीईओ को आदेश जारी कर निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी कर अभिमत सहित रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। जांच आदेश के बाद पंचायत प्रतिनिधियों में हड़कंप मचा हुआ है और ग्रामीणों की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो पंचायत में हुए कई और वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हो सकता है। वहीं लोगों ने प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि विकास योजनाओं की राशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके और भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।