अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने न्यूनतम मूल वेतन 30 हजार करने की मांग उठाई

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम 2026 के प्रारूप पर सुझाव देते हुए न्यूनतम मूल वेतन 30 हजार रुपये निर्धारित करने की मांग की है। संगठन ने आवास, शिक्षा, चिकित्सा और संचार सुविधाओं के खर्च में वृद्धि सहित कई महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित किए हैं।

May 16, 2026 - 16:57
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अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने न्यूनतम मूल वेतन 30 हजार करने की मांग उठाई

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम 2026 के प्रारूप को लेकर राज्य शासन के श्रम विभाग को विस्तृत सुझाव भेजे हैं। संगठन ने प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत लाखों अनियमित कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियमों में आवश्यक संशोधन और सुधार की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान प्रारूप में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनमें बदलाव कर कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है।

फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने बताया कि संगठन ने न्यूनतम मूल वेतन कम से कम 30 हजार रुपये निर्धारित करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में कर्मचारियों के लिए मौजूदा वेतनमान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि मजदूरी की न्यूनतम दर की गणना से संबंधित नियम 3 में आवासीय किराया व्यय को भोजन और वस्त्र व्यय के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत किए जाने का सुझाव दिया गया है।

संगठन ने बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा आवश्यकताओं, मनोरंजन और अन्य आकस्मिक खर्चों के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत राशि को बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने की मांग भी की है। इसके साथ ही आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मोबाइल और संचार सुविधाओं के खर्च को भी इसमें शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

फेडरेशन ने मजदूरी की न्यूनतम दर तय करने के मापदंडों में भी संशोधन की मांग की है। संगठन का कहना है कि शासकीय क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को भी स्पष्ट रूप से नियमों में शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा तकनीकी समिति में कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव भी भेजा गया है ताकि कर्मचारियों की समस्याओं और आवश्यकताओं को सीधे तौर पर रखा जा सके।

प्रदेश उपाध्यक्ष युगल किशोर साहू ने कहा कि न्यूनतम मूल वेतन का पुनरीक्षण वर्ष 2017 में किया गया था। उस समय विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों के अनुसार वेतन 7800 रुपये से लेकर 10530 रुपये तक निर्धारित किया गया था, जो वर्तमान महंगाई और जीवन यापन की लागत के हिसाब से बेहद कम है।

फेडरेशन के पदाधिकारियों आशीष तनेजा, राजकुमार साहू और राजकुमार सिंह ने कहा कि “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत के अनुरूप अनियमित कर्मचारियों को भी स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अनियमित कर्मचारी समान कार्य करने के बावजूद वेतन और सुविधाओं में असमानता का सामना कर रहे हैं।

फेडरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम प्रकाश गजेन्द्र ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी और मजदूरी नियमों को अधिक कर्मचारी हितैषी बनाएगी। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शासकीय कार्यप्रणाली की कार्यक्षमता में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।