सुरक्षित बचपन की दिशा में बड़ा कदम, सड़क और बाल श्रम से बच्चों को निकालकर शिक्षा से जोड़ रही सरकार

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में जून माह के दौरान विशेष सघन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत सड़क, भिक्षावृत्ति, बाल श्रम और कचरा संग्रहण में लगे बच्चों को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और पुनर्वास से जोड़ा जा रहा है।

Jun 11, 2026 - 13:21
 0  2
सुरक्षित बचपन की दिशा में बड़ा कदम, सड़क और बाल श्रम से बच्चों को निकालकर शिक्षा से जोड़ रही सरकार

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ सरकार बच्चों के सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्यभर में ऐसे बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए विशेष सघन अभियान संचालित किया जा रहा है, जो सड़क पर जीवन यापन करने, भिक्षावृत्ति करने, बाल श्रम में संलग्न रहने या कचरा संग्रहण जैसे कार्यों में मजबूर हैं। यह अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित यह अभियान “बाल सक्षम नीति-2022” के अंतर्गत क्रियान्वित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य असुरक्षित परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास की सुविधाओं से जोड़ना है। सरकार का मानना है कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण और विकास के समान अवसर मिलना उसका मौलिक अधिकार है।

अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग, श्रम विभाग, नगरीय निकायों तथा जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से विशेष रेस्क्यू दल गठित किए गए हैं। ये दल राज्य के विभिन्न जिलों में चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में जाकर ऐसे बच्चों की पहचान कर रहे हैं, जो सड़क पर रहने, भीख मांगने या श्रम कार्यों में लगे हुए हैं। बच्चों को रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है, जहां उनकी परिस्थितियों का मूल्यांकन कर आवश्यक संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

पुनर्वास प्रक्रिया के अंतर्गत बच्चों को संस्थागत देखभाल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, परामर्श और मनोसामाजिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन बच्चों को पारिवारिक वातावरण में सुरक्षित रूप से पुनर्स्थापित किया जा सकता है, उन्हें आवश्यक सहायता और निगरानी के साथ परिवारों से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, स्वरोजगार और आजीविका कार्यक्रमों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है।

लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि बच्चों का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज का भी नैतिक दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी बच्चे को शोषण, उपेक्षा या असुरक्षित जीवन जीने के लिए मजबूर नहीं होने देगी। बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

अभियान की विशेषता यह है कि इसे केवल एक माह की गतिविधि तक सीमित नहीं रखा गया है। मिशन वात्सल्य के अंतर्गत बाल स्वराज पोर्टल पर बच्चों की जानकारी नियमित रूप से अद्यतन की जा रही है और उनके पुनर्वास की प्रगति की सतत निगरानी की जा रही है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि रेस्क्यू किए गए बच्चे दोबारा असुरक्षित परिस्थितियों में न पहुंचें और उन्हें दीर्घकालिक संरक्षण प्राप्त हो।

प्रदेशभर में संचालित यह विशेष अभियान उन बच्चों के जीवन में नई उम्मीद और नए अवसर लेकर आया है, जो अब तक कठिन परिस्थितियों में अपना बचपन बिताने को मजबूर थे। सरकार के प्रयासों से ऐसे बच्चे अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। यह पहल न केवल बाल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि संवेदनशील और विकसित समाज के निर्माण की मजबूत आधारशिला भी साबित हो रही है।