बाल श्रम निषेध दिवस पर बड़ी कार्रवाई, जोखिमपूर्ण फैक्ट्री से 9 नाबालिग मुक्त

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अगुवाई में प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाया गया। रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री से 9 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया गया, जबकि विभिन्न स्थानों से कुल 20 बच्चों को संरक्षण में लिया गया। मामले में बाल श्रम और संभावित बाल तस्करी के पहलुओं की जांच की जा रही है।

Jun 13, 2026 - 12:11
 0  8
बाल श्रम निषेध दिवस पर बड़ी कार्रवाई, जोखिमपूर्ण फैक्ट्री से 9 नाबालिग मुक्त

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेशभर में बाल श्रम और बच्चों के शोषण के खिलाफ विशेष अभियान चलाते हुए बड़ी कार्रवाई की। अभियान के दौरान रायपुर, बिलासपुर और रेलवे स्टेशनों से कुल 20 बच्चों को संरक्षण में लिया गया। इस कार्रवाई का उद्देश्य बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन के मामलों पर प्रभावी रोक लगाना था।

विशेष अभियान के तहत आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक औद्योगिक इकाई में औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों से जोखिमपूर्ण और श्रमसाध्य कार्य कराया जा रहा था। कार्रवाई करते हुए मौके से 9 बच्चों को मुक्त कराया गया और उन्हें तत्काल संरक्षण में लिया गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि रेस्क्यू किए गए बच्चे विभिन्न राज्यों से संबंधित हैं। इनमें ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली और पश्चिम बंगाल के आसनसोल क्षेत्र के बच्चे शामिल हैं। बच्चों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें एक ठेकेदार के माध्यम से रायपुर लाया गया था। इस जानकारी के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और संभावित बाल तस्करी के पहलुओं की जांच शुरू कर दी गई है।

अभियान के दौरान बिलासपुर में रेलवे सुरक्षा बल की सहायता से 7 बच्चों तथा रायपुर जीआरपी के माध्यम से 4 बच्चों को संरक्षण में लिया गया। इस प्रकार प्रदेशभर में कुल 20 बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया। सभी बच्चों को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करते हुए संबंधित प्रक्रियाओं के तहत बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

जांच के दौरान बच्चों के साथ शोषण, क्रूरता और जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने के संकेत मिलने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई प्रारंभ की गई है। साथ ही बाल श्रम और संभावित मानव तस्करी से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं की भी विस्तृत जांच की जा रही है।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और जोखिमपूर्ण उद्योगों में उनसे काम कराना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। आयोग बाल श्रम और बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस अभियान में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला, विपिन ठाकुर, श्रम विभाग की टीम तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को परामर्श, चिकित्सकीय सहायता, संरक्षण और पुनर्वास से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है। यह कार्रवाई बाल अधिकारों की रक्षा और बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।