अल-नीनो की चुनौती से निपटने छत्तीसगढ़ तैयार, किसानों के लिए विशेष रणनीति लागू
अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। कम अवधि की फसलें, दलहन-तिलहन, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्धता और फसल बीमा पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l अल-नीनो के संभावित प्रभाव के कारण इस वर्ष मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। राज्य सरकार ने सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए कम अवधि वाली फसलों को बढ़ावा देने, दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और फसल बीमा को प्रभावी बनाने की दिशा में व्यापक रणनीति तैयार की है।
यह जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री राम विचार नेताम ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में दी। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ. विवेक त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 22 जून 2026 तक औसत वर्षा केवल 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले दस वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ सीजन के लिए राज्य में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन वर्षा की कमी के कारण अब तक केवल लगभग 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो सकी है।
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने बताया कि सरकार किसानों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए हर स्तर पर तैयारी कर रही है। राज्य में कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बारिश में देरी होने की स्थिति में भी उत्पादन प्रभावित न हो। इसके साथ ही किसानों को मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहन और तिलहन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में अनाज फसलों के साथ दलहन और तिलहन को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्य बीज निगम द्वारा किसानों को पर्याप्त बीज उपलब्ध कराने के लिए 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सूखे की आशंका वाले 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल बीज किसानों तक पहुंचाया जा चुका है।
इसके अलावा कृषि विभाग द्वारा रासायनिक उर्वरकों के पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था की गई है। किसानों को नैनो उर्वरकों और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों के संबंध में जागरूक किया जा रहा है। राज्य सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल बीमा योजनाओं को भी प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्राकृतिक आपदा या कम वर्षा की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वैज्ञानिकों द्वारा अल-नीनो की संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि समय रहते की गई ये तैयारियां किसानों को राहत देने के साथ कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित होंगी।