जाति प्रमाण-पत्र नियमों के परिपालन की मांग: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संघर्ष मोर्चा का ज्ञापन

जाति प्रमाण-पत्र बनाओ संघर्ष मोर्चा की अध्यक्ष सावित्री जगत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन सौंपकर भारत सरकार के 10 जून 2025 के निर्देशों के तत्काल परिपालन की मांग की है, ताकि राज्य पुनर्गठन तिथि के आधार पर अनुसूचित जाति/जनजाति प्रमाण-पत्र जारी हो सकें।

Mar 3, 2026 - 12:32
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जाति प्रमाण-पत्र नियमों के परिपालन की मांग: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संघर्ष मोर्चा का ज्ञापन

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर | जाति प्रमाण-पत्र बनाओ संघर्ष मोर्चा की अध्यक्ष सावित्री जगत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन सौंपकर छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण-पत्र जारी करने से संबंधित केंद्र सरकार के नवीन दिशा-निर्देशों के तत्काल परिपालन की मांग की है।

ज्ञापन में बताया गया कि राज्य में लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है कि जाति प्रमाण-पत्र के लिए वर्ष 1950 के पूर्व के राजस्व दस्तावेजों की अनिवार्यता के कारण हजारों पात्र परिवार अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं। संघर्ष मोर्चा और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा वर्षों से इस विषय को लेकर आंदोलन, ज्ञापन और पत्राचार किया जाता रहा है।

सावित्री जगत ने कहा कि हाल ही में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा पत्र क्रमांक RL-12017/3/2024-RL Cell, दिनांक 10 जून 2025 के माध्यम से सभी राज्यों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम की अधिसूचना की तिथि को जो व्यक्ति उत्तराधिकारी राज्य के स्थायी निवासी थे, वे उस राज्य में अनुसूचित जाति या जनजाति के प्रमाण-पत्र के लिए पात्र होंगे, भले ही वे अविभाजित राज्य के किसी अन्य हिस्से से मूल रूप से संबंधित रहे हों।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रमाण-पत्र जारी करते समय केवल यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति या उसके माता-पिता राज्य पुनर्गठन की निर्धारण तिथि पर उस राज्य के स्थायी निवासी थे और उनकी जाति राज्य की अधिसूचित सूची में शामिल है। वर्ष 1950 के पूर्व के दस्तावेज की अनिवार्यता को आधार बनाकर किसी भी पात्र व्यक्ति को वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

संघर्ष मोर्चा ने बताया कि ये दिशा-निर्देश मध्यप्रदेश और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्णयों के आलोक में जारी किए गए हैं, जिनमें यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य पुनर्गठन के बाद अनुसूचित जाति और जनजाति की पात्रता निर्धारित करने के लिए “निर्धारण तिथि” ही मान्य आधार है।

ज्ञापन में मुख्यमंत्री से तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं।
पहली, छत्तीसगढ़ राज्य में तत्काल प्रभाव से केंद्र सरकार के उक्त पत्र का परिपालन सुनिश्चित किया जाए।
दूसरी, राज्य के सभी जिलों के जिला दंडाधिकारियों एवं जाति प्रमाण-पत्र जारी करने वाले अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं कि वे केंद्र सरकार के पत्र और उच्च न्यायालयों के निर्णयों के अनुसार ही प्रमाण-पत्र जारी करें।
तीसरी, जिन व्यक्तियों के जाति प्रमाण-पत्र पूर्व में इसी भ्रांति के कारण रोके गए या निरस्त कर दिए गए थे, उनके मामलों का नए दिशा-निर्देशों के अनुसार पुनः निराकरण किया जाए।

सावित्री जगत ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य और उनके संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने आशा जताई कि छत्तीसगढ़ शासन इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेकर पात्र नागरिकों को राहत प्रदान करेगा।

ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्य के मुख्य सचिव तथा अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री गुरु खुशवंत साहब एवं विभागीय सचिव को भी भेजी गई है, ताकि पूरे राज्य में एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत जाति प्रमाण-पत्र जारी किए जा सकें।