भाजपा किसान मोर्चा की कार्यशाला: प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाकर किसान बनेंगे आत्मनिर्भर

एमसीबी जिले के खड़गवां में भाजपा किसान मोर्चा द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक खेती पर विशाल कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत जैसी तकनीकों की जानकारी दी।

Jun 15, 2026 - 10:46
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भाजपा किसान मोर्चा की कार्यशाला: प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाकर किसान बनेंगे आत्मनिर्भर

UNITED NEWS OF ASIA. हेमन्त कुमार, एमसीबी l एमसीबी जिले के खड़गवां में भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्राकृतिक एवं जैविक खेती विषय पर एक विशाल किसान कार्यशाला का आयोजन किया गया। भाजपा जिलाध्यक्ष चंपा देवी पावले के मार्गदर्शन और किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष राम प्रताप गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की उन्नत तकनीकों से परिचित कराना, खेती की लागत कम करना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना था। कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों के साथ-साथ रसायनमुक्त खेती के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह खेती पद्धति न केवल भूमि की उर्वरता और उत्पादकता को बढ़ाती है, बल्कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता भी कम करती है। इससे खेती की लागत घटती है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। साथ ही उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक और रसायनमुक्त खाद्यान्न उपलब्ध होता है, जो वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता है।

किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष राम प्रताप गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और सिंचाई संबंधी विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल कृषि पद्धति नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया।

कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत जैसी तकनीकों को तैयार करने की विधि तथा उनके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। वैज्ञानिकों ने बताया कि इन तकनीकों के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और फसलों की उत्पादकता बढ़ती है।

किसानों ने कार्यशाला में विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और रसायनमुक्त कृषि अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम का समापन “विकसित भारत, समृद्ध किसान और स्वस्थ पर्यावरण” के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रदेश मंत्री संपूर्णानंद मिश्रा, संभाग प्रभारी प्रवीण यादव सहित भाजपा के अनेक जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कृषि विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यशाला को किसानों के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक पहल के रूप में सराहा गया।