गंभीर रूप से घायल असहाय महिला को मिला समय पर उपचार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की मानवीय पहल बनी मिसाल
मनेंद्रगढ़ में गंभीर रूप से घायल और मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पुलिस और सखी वन स्टॉप सेंटर के संयुक्त प्रयासों से समय पर उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई। महिला को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सूरजपुर जिला चिकित्सालय रेफर किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसार, कोरिया l मनेंद्रगढ़ में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर एक गंभीर रूप से घायल और मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को समय पर उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराकर मानवीय संवेदनशीलता का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया गया। यह कार्रवाई माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देशानुसार की गई, जिसके तहत जरूरतमंद और असहाय व्यक्तियों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार महिला ने अपना नाम रूपा बताया और स्वयं को सूरजपुर क्षेत्र का निवासी बताया। वह पिछले कुछ दिनों से मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में भटकते हुए रह रही थी। स्थानीय लोगों की नजर जब उसकी गंभीर स्थिति पर पड़ी तो मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई। महिला के शरीर पर चोट के निशान थे और उसकी स्थिति चिंताजनक बताई गई।
सूचना मिलते ही संबंधित विभागों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला को 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार किया और स्वास्थ्य की स्थिति का परीक्षण किया। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि महिला को गंभीर चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है। स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए जिला चिकित्सालय सूरजपुर रेफर कर दिया।
महिला के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की जानकारी मिलने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े पैरा लीगल वालंटियर (पीएलवी) अजय विश्वकर्मा और अंजनी यादव सक्रिय हुए। उन्होंने सखी वन स्टॉप सेंटर की कार्यकर्ता सुप्रिया तिवारी और पूजा रजक के साथ मिलकर महिला को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभाली। सभी ने समन्वित प्रयास करते हुए महिला को सुरक्षित रूप से चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई और आगे के उपचार के लिए सूरजपुर भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की।
इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दिया। समय पर की गई इस पहल के कारण महिला को आवश्यक चिकित्सा सहायता मिल सकी, जिससे उसकी स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों ने इस मानवीय कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। लोगों ने माना कि असहाय, बेसहारा और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा की गई यह पहल न केवल एक जरूरतमंद महिला के जीवन को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से मानवीय सहायता को प्रभावी ढंग से जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सकता है। यह घटना समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आई है और सेवा, संवेदनशीलता तथा मानवता के मूल्यों को मजबूत करने का संदेश देती है।