बीजापुर पोर्टा केबिन छात्रावास मामला: आप की जांच समिति ने अधीक्षक और विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए
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UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर । छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गंगालूर क्षेत्र स्थित पोर्टा केबिन छात्रावास से जुड़े एक संवेदनशील मामले पर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में छात्रावास अधीक्षक और ट्रायबल विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। पार्टी ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आप की प्रदेश संयुक्त सचिव पूर्णिमा सिन्हा के नेतृत्व में गठित जांच समिति ने इस मामले की पड़ताल की। समिति में प्रदेश संगठन मंत्री समीर खान, प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ और प्रदेश प्रवक्ता जयदीप खनूजा शामिल थे। पत्रकार वार्ता के दौरान समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे।
रिपोर्ट के अनुसार, पोर्टा केबिन छात्रावास में रहने वाली तीन छात्राएं गर्भवती पाई गईं, जिनमें से दो 12वीं और एक 11वीं कक्षा की छात्रा है। बताया गया कि जब ये छात्राएं बोर्ड परीक्षा देने गईं, तब इस मामले का खुलासा हुआ। समिति ने आरोप लगाया कि घटना सामने आने के बाद संबंधित विभागों ने गंभीरता से जांच करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की।
आप नेताओं का कहना है कि यह घटना छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रावास में अनुशासन की कमी है, सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हैं और बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। समिति ने यह भी दावा किया कि एक छात्रा के साथ पहले भी इसी प्रकार की घटना हो चुकी है, जिससे प्रबंधन की लापरवाही और उजागर होती है।
समिति ने सवाल उठाया कि यदि छात्राएं लंबे समय से इस स्थिति में थीं, तो छात्रावास प्रबंधन को इसकी जानकारी समय पर क्यों नहीं हुई। साथ ही यह भी पूछा गया कि स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में प्रबंधन को सूचित क्यों नहीं किया। समिति के अनुसार, यह मामला केवल छात्रावास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ट्रायबल विभाग और शिक्षा विभाग की भी जिम्मेदारी बनती है।
आप नेताओं ने कहा कि जिले में दो-दो जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) होने के बावजूद ऐसी घटना का होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं हैं, जिसके कारण इस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं।
हालांकि, इस मामले में छात्रावास अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन आप ने इसे पर्याप्त नहीं माना है। पार्टी का कहना है कि केवल निलंबन से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जानी चाहिए। दोषी पाए जाने पर बड़े अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
आप ने यह भी कहा कि आदिवासी छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
फिलहाल, यह मामला प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की नजरें सरकार और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।