गुवारा स्कूल हादसे पर जिला प्रशासन सख्त, जांच समिति गठित, जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस

बेमेतरा जिले के गुवारा प्राथमिक स्कूल में कक्षा की छत का प्लास्टर गिरने से दो बच्चों के घायल होने के मामले में जिला प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है और संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

Jul 15, 2026 - 13:44
Jul 15, 2026 - 13:45
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गुवारा स्कूल हादसे पर जिला प्रशासन सख्त, जांच समिति गठित, जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा। जिले के विकासखंड साजा अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला गुवारा में कक्षा की छत का प्लास्टर गिरने से दो विद्यार्थियों के घायल होने की घटना को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देश पर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

घटना में प्रवेश और पारस नामक दो विद्यार्थी घायल हुए हैं। दोनों का उपचार कराया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस भवन में यह हादसा हुआ, उसका मरम्मत कार्य मुख्यमंत्री जतन योजना के तहत वर्ष 2023 में कराया गया था। अब मरम्मत कार्य की गुणवत्ता, निर्माण एजेंसी की भूमिका और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की विस्तृत जांच की जाएगी।

जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय संयुक्त जांच समिति का गठन किया है। समिति में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता डी.के. चंदेल, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अनुविभागीय अधिकारी अमर सिंह पैंकरा, सीजीएमएससी के उप अभियंता कमल सिन्हा तथा मंडी बोर्ड के उप अभियंता परवेज बेग को शामिल किया गया है। समिति को सात दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

घटना के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने शासकीय प्राथमिक शाला गुवारा के प्रधान पाठक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि जर्जर भवन में बच्चों को नहीं बैठाने और भवन को बंद रखने संबंधी पूर्व निर्देशों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विकासखंड स्रोत समन्वयक तथा संबंधित संकुल समन्वयक से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रशासन का कहना है कि जर्जर विद्यालय भवनों का समय पर निरीक्षण कर उन्हें चिन्हित करने, उपयोग पर रोक लगाने और आवश्यक निर्देश जारी करने में लापरवाही बरती गई, जिसके कारण यह अप्रिय घटना हुई।

कलेक्टर कार्यालय ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया है कि तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि संबंधित विद्यालय को जर्जर भवनों की सूची में शामिल क्यों नहीं किया गया और बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए थे।

मुख्यमंत्री जतन योजना के अंतर्गत कराए गए मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं। इसे देखते हुए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) के कार्यपालन अभियंता को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें 24 घंटे के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में निर्माण कार्यों के निरीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध समय पर कार्रवाई नहीं करने पर जवाब मांगा गया है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, निर्माण एजेंसी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना और विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।