बैठक में कलेक्टर ने आधार आधारित उपस्थिति, गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत एएनसी पंजीयन, समय पर जांच और संस्थागत प्रसव को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं का प्रारंभिक पंजीयन समय पर हो और उनकी आवश्यक जांचें सुनिश्चित की जाएं। साथ ही हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की नियमित मॉनिटरिंग और प्राथमिकता के आधार पर उपचार की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया।
कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और कुपोषित बच्चों के आंकड़ों का स्वास्थ्य विभाग से मिलान किया जाए, ताकि कोई भी पात्र हितग्राही योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। सुपोषण अभियान, पोषण पुनर्वास और टीकाकरण सत्रों की नियमितता पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।
बैठक में मलेरिया, क्षयरोग (टीबी), कुष्ठ, एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिजीज) और एचआईवी जांच सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी कार्यक्रमों के लक्ष्यों को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए और विकासखंड स्तर पर सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार की जाए।
दवाइयों की उपलब्धता, पर्याप्त भंडारण और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या लक्ष्य पूर्ति में शिथिलता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की ट्रैकिंग, टीकाकरण और आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य अमले के संयुक्त प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि दोनों विभागों के बेहतर समन्वय से ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृत लाल रोहलेडर, सिविल सर्जन डॉ. लोकेश साहू, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, सभी बीएमओ, जिला नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
अंत में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मॉडल जिला बनाने के लक्ष्य के साथ योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।