बस्तर में सुरक्षा कैंप बनेंगे जन सुविधा केंद्र, अमित शाह करेंगे नई पहल की शुरुआत

बस्तर में सुरक्षा कैंपों की तस्वीर बदलने जा रही है। अब फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहां डिजिटल सेवा केंद्र, स्किल डेवलपमेंट और वन उत्पाद प्रोसेसिंग जैसी जनसुविधाएं भी शुरू की जाएंगी। इस पहल की शुरुआत गृह मंत्री अमित शाह नेतनार सीआरपीएफ कैंप से करेंगे।

May 14, 2026 - 15:38
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बस्तर में सुरक्षा कैंप बनेंगे जन सुविधा केंद्र, अमित शाह करेंगे नई पहल की शुरुआत

UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र, जो कभी नक्सलवाद और हिंसा के कारण देशभर में चर्चित रहा करता था, अब तेजी से विकास और बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की नई रणनीति के तहत बस्तर में स्थापित सुरक्षा कैंपों को अब जन सुविधा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इस नई पहल के जरिए सुरक्षा कैंप केवल ऑपरेशन और सुरक्षा गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए विकास और जनसेवा के केंद्र बनेंगे।

इस परिवर्तनकारी पहल की शुरुआत देश के गृह मंत्री अमित शाह करने जा रहे हैं। वे बस्तर के नेतनार स्थित सीआरपीएफ कैंप से इस नई व्यवस्था का शुभारंभ करेंगे। सरकार का उद्देश्य सुरक्षा बलों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

नई योजना के तहत बस्तर संभाग के सभी फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) यानी सुरक्षा कैंपों में 3 से 4 बैरकों को जन समस्या निवारण और जन सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों में ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार की डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ग्रामीण अब दस्तावेज़ संबंधी कार्य, ऑनलाइन आवेदन, प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ सीधे इन केंद्रों से प्राप्त कर सकेंगे।

इसके अलावा युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग भी दी जाएगी। सरकार की योजना है कि स्थानीय युवाओं को तकनीकी और स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। इससे न केवल बेरोजगारी कम होगी, बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

बस्तर की पहचान जंगल और वन संपदा से जुड़ी रही है। इसे ध्यान में रखते हुए माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस यानी लघु वनोपज की प्रोसेसिंग यूनिट भी इन कैंपों में स्थापित की जाएगी। इससे स्थानीय लोगों को अपने वन उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सकेगा और जंगल आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी और विकास की मुख्यधारा से उनका जुड़ाव बढ़ेगा।

बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने इस पहल को लेकर कहा कि क्षेत्र में नक्सल गतिविधियां काफी हद तक कम हो चुकी हैं। ऐसे में अब सुरक्षा कैंपों के कुछ हिस्सों का उपयोग जनसुविधाओं के लिए किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी इस योजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल बस्तर के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। लंबे समय तक संघर्ष और हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में यदि सुरक्षा कैंप विकास केंद्रों में बदलते हैं, तो इससे स्थानीय लोगों का भरोसा बढ़ेगा और प्रशासन के प्रति सकारात्मक माहौल बनेगा।

सरकार की यह नई रणनीति स्पष्ट संकेत देती है कि अब बस्तर केवल सुरक्षा अभियानों का क्षेत्र नहीं रहेगा, बल्कि विकास, शिक्षा, रोजगार और जनसेवा का नया मॉडल बनकर उभरेगा। आने वाले समय में यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास आधारित शांति मॉडल के रूप में भी सामने आ सकती है।