मुंबई में मराठी साइनबोर्ड अनिवार्य, नियम नहीं मानने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

मुंबई में दुकानों, होटलों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को एक महीने के भीतर देवनागरी लिपि में मराठी साइनबोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। बीएमसी उपमहापौर संजय घड़ी ने नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ ‘शिवसेना स्टाइल’ में कार्रवाई की चेतावनी दी है।

May 14, 2026 - 16:01
 0  2
मुंबई में मराठी साइनबोर्ड अनिवार्य, नियम नहीं मानने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l मुंबई में दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर मराठी भाषा में साइनबोर्ड लगाना अब अनिवार्य कर दिया गया है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के उपमहापौर संजय घड़ी ने सभी दुकानों, पांच सितारा होटलों, सेलिब्रिटी स्वामित्व वाले आउटलेट्स और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को एक महीने के भीतर देवनागरी लिपि में मराठी साइनबोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

बुधवार को उपमहापौर संजय घड़ी ने बीएमसी के दुकान एवं प्रतिष्ठान विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार मुंबई में मराठी भाषा में साइनबोर्ड लगाना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चाहे कोई पांच सितारा होटल हो या बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सभी को नियमों का पालन करना होगा।

संजय घड़ी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहरभर में निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी प्रतिष्ठानों में मराठी साइनबोर्ड लगाए गए हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने नियम लागू करने में लापरवाही बरती, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में बीएमसी की विधि समिति की अध्यक्ष दीक्षा करकर ने भी प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों को अभी तक नोटिस जारी नहीं किए गए हैं, उन्हें तुरंत नोटिस भेजा जाए और एक महीने के भीतर नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों से ऐसे प्रतिष्ठानों की सूची तैयार करने को कहा है जो अब भी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।

शिवसेना नेताओं ने इस मुद्दे को मराठी अस्मिता और स्थानीय भाषा के सम्मान से जोड़ते हुए सख्त रुख अपनाया है। शिवसेना पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर मराठी साइनबोर्ड नहीं लगाए गए, तो संगठन के कार्यकर्ता “शिवसेना अंदाज” में जवाब देंगे। यह बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

जानकारी के मुताबिक मुंबई में करीब नौ लाख दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। इनमें से लगभग 5,020 प्रतिष्ठानों ने अभी तक मराठी साइनबोर्ड से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया है। बीएमसी द्वारा अब तक 3,114 प्रतिष्ठानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है और करीब 1.91 करोड़ रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है।

महाराष्ट्र में लंबे समय से मराठी भाषा और स्थानीय पहचान को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा अभियान चलाए जाते रहे हैं। शिवसेना और अन्य क्षेत्रीय दल अक्सर सार्वजनिक स्थलों, दुकानों और कार्यालयों में मराठी भाषा को प्राथमिकता देने की मांग करते रहे हैं। अब बीएमसी के इस नए अभियान को उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

व्यापारिक संगठनों के बीच इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ व्यापारी इसे स्थानीय भाषा के सम्मान से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ छोटे व्यापारियों का कहना है कि नए साइनबोर्ड लगाने में अतिरिक्त खर्च आएगा। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह नियम पहले से लागू है और अब केवल इसका सख्ती से पालन कराया जा रहा है।

बीएमसी का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य मराठी भाषा को बढ़ावा देना और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना है। आने वाले दिनों में मुंबई में बड़े पैमाने पर निरीक्षण अभियान चलाए जाने की संभावना है।