खाद कालाबाजारी के आरोपों से गरमाया बसना, किसानों ने कार्रवाई में देरी पर उठाए सवाल
महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र में एक कृषि सेवा केंद्र पर खाद की कथित ओवररेटिंग और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। किसानों और किसान संगठनों ने प्रशासन पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया है। वहीं कलेक्टर ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही है।
UNITED NEWS OF ASIA. जगदीश पटेल, सरायपाली l महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र में खाद की कथित कालाबाजारी और ओवररेटिंग के आरोपों को लेकर किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एक कृषि सेवा केंद्र के खिलाफ सामने आए आरोपों के बाद किसान संगठनों ने प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। किसानों का आरोप है कि शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के बावजूद मामले में अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई गई है
जानकारी के अनुसार, बसना स्थित विजय कृषि सेवा केंद्र पर किसानों को निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर यूरिया खाद बेचने के आरोप लगाए गए हैं। किसान संगठनों का दावा है कि 266 रुपये मूल्य की यूरिया खाद अधिक कीमत पर बेची जा रही थी तथा किसानों को अन्य उत्पाद खरीदने के लिए भी दबाव डाला जा रहा था। इन आरोपों को लेकर क्षेत्र में लगातार चर्चा बनी हुई है।
किसानों का यह भी आरोप है कि संबंधित कृषि सेवा केंद्र को खाद विक्रय का लाइसेंस बसना नगर क्षेत्र के लिए जारी किया गया था, जबकि संचालन किसी अन्य स्थान से किए जाने की शिकायत सामने आई है। मामले को लेकर किसानों और किसान संगठनों ने प्रशासन से जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
राष्ट्रीय किसान परिषद के महामंत्री महेंद्र साव ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई की प्रक्रिया अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रही है, जिससे किसानों में असंतोष है।
वहीं किसानों द्वारा शिकायत कलेक्टर तक पहुंचने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
मामले को लेकर कृषि विभाग की भूमिका भी चर्चा में है। किसान संगठनों का आरोप है कि यदि शुरुआती स्तर पर प्रभावी कार्रवाई होती तो विवाद इतना नहीं बढ़ता। हालांकि विभागीय अधिकारियों की ओर से अभी तक आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्षेत्र में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। किसान संगठनों का कहना है कि यदि दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती है तो वे आंदोलन की राह भी अपना सकते हैं।
फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोप कितने सही हैं और संबंधित पक्षों पर क्या कार्रवाई की जाती है।