बसीबार पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ा

कोरबा जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बसीबार में तत्कालीन और वर्तमान सरपंच पर 15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पुराने कार्यों को नया दिखाकर राशि आहरित की गई, जिससे पंचायत में भारी नाराजगी व्याप्त है।

Jun 4, 2026 - 12:34
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बसीबार पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ा

UNITED NEWS OF ASIA. राहुल, कोरबा l जनपद पंचायत पाली के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बसीबार में वित्तीय अनियमितताओं और शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। पंचायत के उपसरपंच और ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायतों के बाद पंचायत में हुए विकास कार्यों और वित्तीय लेन-देन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में बीते कार्यकाल के दौरान 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए कई कार्यों में वास्तविक लागत से अधिक राशि आहरित की गई। वहीं वर्तमान कार्यकाल में उन्हीं पुराने कार्यों को नया बताकर दोबारा राशि निकालने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे पंचायत को आर्थिक नुकसान पहुंचा है और विकास कार्यों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, पंचायत में पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न मोहल्लों और वार्डों में बोर खनन, सबमर्सिबल पंप तथा सिंटेक्स टंकी स्थापना के कार्य पूर्व में किए जा चुके थे। इसके अलावा कुछ स्थानों पर सीसी रोड निर्माण भी कराया गया था। आरोप है कि इन कार्यों के लिए पहले ही 15वें वित्त आयोग की राशि खर्च की जा चुकी थी, लेकिन बाद में इन्हीं कार्यों को नए कार्य के रूप में दर्शाकर पुनः राशि आहरित की गई।

ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार संतराम के घर के पास बोर खनन एवं पेयजल व्यवस्था, बासोड मोहल्ला में बोर खनन, शिवसिंह और प्यारे के घर के पास बोर खनन जैसे कार्यों के लिए पूर्व में लाखों रुपए की राशि जारी की गई थी। आरोप है कि बाद में इन्हीं कार्यों को वर्तमान पंचायत कार्यकाल में नया दर्शाकर पुनः भुगतान किया गया। इसी प्रकार आंगनबाड़ी से हेतराम के घर तक निर्मित सीसी रोड को भी नए निर्माण कार्य के रूप में दर्ज कर राशि निकाले जाने का दावा किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उनका आरोप है कि तकनीकी अमले की मिलीभगत से फर्जी मूल्यांकन पुस्तिका (एमबी) और बिल-वाउचर तैयार कर राशि आहरित की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से भी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मामले को लेकर ग्रामीणों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि पंचायत को मिलने वाली राशि गांव के विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए होती है, लेकिन यदि उसमें अनियमितता होती है तो इसका सीधा नुकसान ग्रामीणों को उठाना पड़ता है। ग्रामीण अब इस पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय में करने की तैयारी कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत में हुए सभी विकास कार्यों, भुगतान विवरण और तकनीकी स्वीकृतियों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पंचायत में उठे इस विवाद ने स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है और अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।