बलरामपुर में भ्रष्टाचार का खुलासा: बिना निर्माण के नाली का पैसा निकाला, शिकायत के बाद शुरू हुआ काम
बलरामपुर जिले के आमगांव में नाली निर्माण के नाम पर राशि निकासी के बावजूद काम नहीं हुआ। ग्रामीणों की शिकायत के बाद अचानक निर्माण शुरू होने से भ्रष्टाचार के आरोप और गहराए।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर | छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से भ्रष्टाचार की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने विकास कार्यों में पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला जनपद पंचायत शंकरगढ़ के ग्राम आमगांव का है, जहां नाली निर्माण के नाम पर सरकारी राशि तो वर्ष 2023-24 में ही निकाल ली गई, लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं हुआ।
ग्रामीणों के अनुसार, जिस नाली का निर्माण वर्षों से लंबित था, उसका पूरा बजट कागजों में खर्च दिखा दिया गया। जब ग्रामीणों को इस बात की जानकारी मिली कि बिना निर्माण के ही राशि का भुगतान कर दिया गया है, तो उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) से लिखित शिकायत की।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार का प्रतीक है, जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि जैसे ही शिकायत की जांच शुरू होने की संभावना बनी, पंचायत में अचानक गतिविधियां तेज हो गईं। जो कार्य पिछले तीन वर्षों से नहीं हुआ था, वह शिकायत के बाद रातों-रात शुरू होने लगा। गांव में आनन-फानन में बालू, गिट्टी और निर्माण सामग्री गिराई जाने लगी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह निर्माण कार्य वास्तविक विकास के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश के रूप में किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि शिकायत नहीं की जाती, तो संभवतः यह मामला कभी सामने नहीं आता और सरकारी राशि पूरी तरह से हजम कर ली जाती।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी कितनी प्रभावी है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे आम जनता का शासन-प्रशासन पर विश्वास कमजोर हो सकता है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को किस तरह लेता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई कर ग्रामीणों को न्याय दिला पाता है या नहीं।