बलरामपुर में मासूम छात्रा से दुर्व्यवहार का आरोप, पानी गिरने पर प्रधान पाठक ने सिर पर उड़ेला पानी

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी ब्लॉक में एक 6 वर्षीय छात्रा के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। प्रधान पाठक पर आरोप है कि पानी गिरने पर उन्होंने बच्ची के सिर पर पानी उड़ेल दिया। परिजनों ने कार्रवाई की मांग की है।

Mar 26, 2026 - 17:45
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बलरामपुर में मासूम छात्रा से दुर्व्यवहार का आरोप, पानी गिरने पर प्रधान पाठक ने सिर पर उड़ेला पानी

UNITED NWES OF ASIA. अली खान, बलरामपुर।  छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नवाडीह कला (बरवाही पारा) से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां प्राथमिक शाला बरवाही में पदस्थ प्रधान पाठक पर कक्षा पहली की एक 6 वर्षीय मासूम छात्रा के साथ कथित दुर्व्यवहार और प्रताड़ना का आरोप लगाया गया है।

पीड़ित बच्ची के दादा दशरथ प्रसाद गुप्ता, जो नवाडीह कला के निवासी हैं, ने इस पूरे मामले की जानकारी दी। उनके अनुसार, उनकी पोती कुमारी आरोही गुप्ता 12 मार्च 2026 को रोज की तरह स्कूल गई थी। कक्षा में पढ़ाई के दौरान उसे प्यास लगी, जिस पर उसने अपने बैग से पानी की बोतल निकालकर पानी पीना शुरू किया। इसी दौरान गलती से थोड़ी मात्रा में पानी जमीन पर गिर गया।

आरोप है कि जैसे ही पानी गिरा, प्रधान पाठक अशोक कुमार गुप्ता गुस्से में आ गए। उन्होंने बच्ची के हाथ से बोतल छीन ली और कथित रूप से उसे डांटते हुए बोतल का पूरा पानी उसके सिर पर उड़ेल दिया। इस घटना से बच्ची काफी डर गई और रोते हुए घर पहुंची, जहां उसने परिजनों को पूरी घटना बताई।

इस घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित प्रधान पाठक का व्यवहार पहले से ही विवादों में रहा है। आरोप है कि वे बच्चों के साथ सख्ती से पेश आते हैं और कई बार अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि वे छोटी-छोटी बातों पर बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। ऐसे में इस घटना ने पूरे गांव में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है और अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

पीड़ित बच्ची के दादा ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान होना चाहिए, जहां वे बिना किसी डर के पढ़ाई कर सकें।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भी शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इससे शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना बाकी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है।

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि स्कूलों में बच्चों के साथ व्यवहार को लेकर सख्त नियमों और निगरानी की कितनी आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और बच्चों को सुरक्षित एवं सकारात्मक माहौल मिल सके।