प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए थे। इस दौरान देवी स्वरूप नौ कन्याओं एवं लगरूवा महाराज का विधिवत पूजन किया गया। उनके चरण धोकर उन्हें आसन पर विराजित किया गया तथा रोली-अक्षत का तिलक लगाकर लाल चुनरी ओढ़ाई गई। इसके बाद कन्याओं को खीर-पूड़ी, फल एवं अन्य प्रसाद का भोज कराया गया।
हवन अनुष्ठान सुबह लगभग 11 बजे प्रारंभ हुआ, जो शाम तक चला। यज्ञ के दौरान दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों के बीज मंत्रों के साथ आहुतियां दी गईं। श्रद्धालुओं ने औषधि युक्त सामग्री के साथ क्रमशः यज्ञशाला में प्रवेश कर आहुति दी और पूर्णाहुति में भाग लिया। अंत में माता की महाआरती कर क्षेत्र में सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई।
इस अवसर पर आचार्य नारायण प्रसाद पाठक ने महाअष्टमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है। उनकी आराधना से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि नवरात्रि साधना का महापर्व है, जिसमें नौ दिनों तक जप-तप करने से मन के विकार दूर होते हैं और माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में समिति के अध्यक्ष कैलाश पवार, प्रमुख संचालक नरेंद्र नाग, उपाध्यक्ष गगन नाहटा, महासचिव नेम सिंह बिशेन, सह सचिव नारद निषाद, बुधेश्वर साहू, कोषाध्यक्ष गेंद लाल यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि सक्रिय रूप से शामिल रहे।
पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना कर मां से अपने परिवार और समाज की खुशहाली की कामना की।
महाअष्टमी पर आयोजित यह भव्य कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक भक्ति का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।