सरपंच ने पेश की ईमानदारी की मिसाल, पति के मकान से खुद हटवाया शासकीय भूमि पर अतिक्रमण

बालोद जिले के ग्राम मेंड़की में ओरमा सरपंच मंजूलता साहू ने अपने पति के मकान से लगे शासकीय भूमि पर हुए अतिक्रमण को स्वयं बुलडोजर चलवाकर हटवा दिया। सुशासन तिहार में की गई शिकायत और सीमांकन के बाद सरपंच ने बिना किसी नोटिस का इंतजार किए स्वेच्छा से कार्रवाई कर ईमानदारी और जवाबदेही की मिसाल पेश की है।

Jun 5, 2026 - 11:25
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सरपंच ने पेश की ईमानदारी की मिसाल, पति के मकान से खुद हटवाया शासकीय भूमि पर अतिक्रमण

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l बालोद, 4 जून 2026। जिले के ग्राम मेंड़की में एक अनोखा और प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जहां ओरमा की सरपंच मंजूलता साहू ने अपने परिवार से जुड़े अतिक्रमण को हटाकर निष्पक्ष प्रशासन और जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया है। सरपंच ने अपने पति के मकान से लगी शासकीय भूमि पर हुए अतिक्रमण को स्वयं बुलडोजर लगवाकर हटवा दिया, जिसकी क्षेत्रभर में चर्चा हो रही है।

जानकारी के अनुसार यह मामला सुशासन तिहार के दौरान सामने आया। ओरमा निवासी रोहित कुमार साहू ने 14 मई 2026 को शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि मेंड़की निवासी परस राम साहू द्वारा निजी भूमि से लगी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।

तहसीलदार आशुतोष शर्मा के निर्देश पर हल्का पटवारी तरन्नुम खान ने शिकायतकर्ता, ग्राम पटेल तथा ग्रामीणों की उपस्थिति में संबंधित भूमि का सीमांकन किया। जांच के दौरान पाया गया कि लगभग 3 से 4 डिसमिल शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। सीमांकन रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई कि जिस भूमि पर अतिक्रमण पाया गया, वह सरपंच मंजूलता साहू के परिवार से जुड़ी हुई है।

सीमांकन की जानकारी मिलते ही सरपंच ने किसी प्रकार के विवाद या प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा किए बिना स्वयं पहल की। 26 मई से 4 जून के बीच बुलडोजर लगवाकर अतिक्रमित हिस्से को हटवा दिया गया। इस कार्रवाई के बाद शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया।

भूमि स्वामी परस राम साहू ने बताया कि शिकायत के बाद पटवारी द्वारा चिन्हित किए गए स्थल से अतिक्रमण हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायतकर्ता को अब भी किसी प्रकार की आपत्ति है तो दोबारा सीमांकन कराया जा सकता है।

मंजूलता साहू ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा की गई शिकायत सही थी और शासकीय भूमि को खाली करना नियमों के अनुसार आवश्यक था। उन्होंने बताया कि यह जमीन उनके परिवार के कब्जे में वर्षों से थी और उनके ससुर ने लगभग 35 वर्ष पहले इसे खरीदा था। बावजूद इसके, जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने नियमों का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को सभी अतिक्रमण के मामलों में समान रूप से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि कानून का पालन सभी के लिए एक समान हो सके। सरपंच का मानना है कि जनप्रतिनिधियों को स्वयं नियमों का पालन कर समाज के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

आमतौर पर लंबे समय से चले आ रहे अतिक्रमण के मामलों में तहसील न्यायालय से नोटिस जारी होने और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई की जाती है। लेकिन इस मामले में सरपंच ने किसी नोटिस का इंतजार किए बिना स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाकर एक सकारात्मक संदेश दिया है।

इस पहल की ग्रामीणों और स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि यदि इसी प्रकार पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करें तो प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।